नरवर किले से सैकडो वर्ष पुरानी तोप चोरी, पुलिस अधीक्षक ने किया घटना स्‍थल का निरीक्षण - Shivpuri


मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 500 साल पुरानी अष्टधातु की बहुमूल्य तोप लूट लिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर वारदात को अंजाम दिया।


पुलिस को अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह पर शक है ऐतिहासिक धरोहरों की वास्तविक कीमत तय नहीं की जा सकती, क्योंकि उनका महत्व धन से कहीं अधिक होता है. हालांकि एंटीक वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इस तरह की सदियों पुरानी धरोहरों की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।


सूचना मिलते की स्‍थानीय पुलिस प्रशासन के साथ - साथ राजस्‍व अधिकारी हरकत में आये तथा पुलिस अधीक्षक ने मौका स्‍थल का निरीक्षण किया तथा कार्यवाही को लेकर आवश्‍यक दिशा निर्देश दिये।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी गिरोह ने 5 जुलाई को भी तोप को उसके स्थान से नीचे गिराने की कोशिश की थी लेकिन भारी वजन के कारण उसे ले नहीं जा सका इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई दस दिन बाद बदमाश पूरी तैयारी के साथ लौटे और वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि उनके पास सुरक्षा के नाम पर केवल एक डंडा था। 


न हथियार, न टॉर्च और न ही पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हथियारबंद बदमाशों के सामने जान बचाना ही उनकी मजबूरी बन गया बताया जा रहा है कि नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें अब 13 ही बची हैं पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर राजचिह्न तथा फारसी-देवनागरी शिलालेख अंकित हैं। 


ऐतिहासिक महत्व के कारण इनकी कीमत अमूल्य मानी जाती है, जबकि अवैध अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसी धरोहरों की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है केयरटेकर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 


शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की भूमिका की आशंका जताई जा रही है अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 दिन पहले मिले संकेतों के बावजूद सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई और आखिर देश की बेशकीमती धरोहर चोरों के हाथ कैसे लग गई।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म