पहले अंग्रेजों ने लूटा, बीच में डकैतों ने, वर्तमान में जनप्रतिनिधि बने कमीशन के नाम लूट का केन्‍द्र - Kolaras

 


ग्राम पंचायतों में 50 से लेकर 100 प्रतिशत तक निर्माण कार्य एवं मूल भूत सुविधाओं में डकार रहें है जनपद एवं ग्राम पंचायत के नुमाइंदे

कोलारस - मध्‍यप्रेदश से लेकर केन्‍द्र की सरकार चाहेती है कि शहरों की तरह गांवों का भी विकास हो जिससे गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोका जा सकें साथ ही शहरों में अत्‍याधिक जनसंख्‍या के चलते पीने के पानी, लाईट, सडक, साफ - सफाई का लोड शहरों जनसंख्‍या बडने के कारण अधिक हो रहा है इसी के चलते प्रदेश एवं केन्‍द्र की सरकार पंचायतों को कुुुुटीर से लेकर निर्माण कार्य, लोगो को मूल भूत सुविधाओं के नाम पर सरकार पंचायतों को करोडो का फण्‍ड मुहिया करा रही है किन्‍तु ऐसी बिरली ही पंचायत होगी जहां बिना कमीशन के कार्य ईमानदारी के साथ हो रहा हो जनपद पंचायत से जुडे सूत्रों ने बताया कि पंचायतों में जनपद से लेकर एई, जेई, सरपंच से लेकर सचिव जिस पर जितना बन पड रहा है सभी लोग मिल जुलकर पंचायतों के फण्‍ड को 50 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक खाने में जुटे हुये है इसी पर यह बात चरितार्थ होती है कि गुलाम भारत में अंग्रेजों ने लूूूटा उसके बाद आजाद भारत में डकैतों का 5 दशक तक लूट का आतंक चला और अब वर्तमान में प्रशासनिक तंत्र से मिलकर हमारे ही चुने हुये जनप्रतिनिधि उसी लाईन पर बीते करीब 3 दशको से चलने का कार्य करते हुुुये दिखाई दे रहे हैै।


कोलारस एवं बदरवास जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत 131 ग्राम पंचायतें आती है ग्राम पंचायतों में पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान करोड़ों का बजट शासन से योजनाओं के नाम पर पंचायतों के विकास एवं भूल भूत कार्यो के लिये प्रदान हुआ इसकी तो जानकारी शायद सभी लोगो को होगी किन्तु देखने वाली बात यह है कि शासन से मिलने वाली राशि जोकि अभी तक मनरेगा के नाम से पंचायतों को प्राप्त होती थी अब उसका नाम बदलकर जीरामजी योजना कर दिया गया मनरेगा के अलावा 15वें वित - पंच परमेश्‍वर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के नाम पर एक पंचायत में यदि करोड़ों का बजट प्राप्त हुआ तो 131 ग्राम पंचायतों में यह राशि करोड़ों में पहुंचती है देखने वाली बात यह है कि शासन से मिलने वाली राशि में से केवल और केवल 25 प्रतिशत राशि ही मौके पर खर्च की गई शेष राशि का फर्जी फर्मो के नाम से बिल निकालकर बटवारा होता रहा है।

हम प्रदेश एवं जिले की जगह अभी केवल कोलारस परगने के बदरवास एवं कोलारस जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली 131 ग्राम पंचायतों की बात कर रहे है यहां सरपंच सचिवों ने स्वयं के परिजनों एवं रिस्तेदारों के नाम से रजिस्टर्ड दुकान की जगह फर्जी कागजों में फर्म बनाकर शासन से चालू पंचवर्षीय कार्यकाल के 4 वर्ष बीत चुके है इन 4 वर्षो के दौरान जीरामजी योजना चालू होने से पूर्व मनरेगा एवं 15वें वित - पंच परमेश्‍वर जैसी योजनाओं में पंचायत के विकास के लिये प्रदेष, केन्द्र, सांसद, विधायक फंड से यदि एक पंचायत को करोड़ों का भुगतान हुआ तो 131 पंचायतों में कितनी राशि प्राप्त हुई होगी आंकलन करने में काफी लम्बा समय लगेगा किन्तु देखने वाली बात यह है कि सरपंच सचिवों के गठजोड़ से चलने वाली लूट की पंचायतों में मौके पर यानि की पंचायत में 25 प्रतिशत राशिका ही उपयोग हुआ शेष राशि को फर्जी फर्मो में फर्जी बिल डालकर करोड़ों का बजट का बटवारा निरंतर जारी है।


जनपद, इंजीनियर, सचिव, सरपंच मिलकर डकार जाते है 75 प्रतिशत राशि - 

परगने की 131 ग्राम पंचायतों में से करीब 90 प्रतिशत से भी अधिक पंचायतों के बारे में जनपद पंचायत के सूत्रों से जो जानकारी प्राप्त हुई है उसके हिसाब से मनरेगा, 15वें वित-पंच परमेश्‍वर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पंचायतों के विकास के लिये प्रदेश एवं केन्द्र से मिलने वाले करोड़ों के बजट को किस आसानी से मिलकर बांटा जाता है उसका एक नमूना हमारे सामने है यदि हम एक पंचायत की वर्षीक अनुमानित बजट का आंकलन करें तो एक पंचायत को यदि वर्ष में एक करोड़ का बजट विभिन्न कार्यो में विकास के लिये मिला तो उसमें से सरपंच, सचिव अपने करीबी की फर्जी फर्म में बिल डालकर निकलने वाली राशि में से 15 प्रतिशत जनपद पंचायत के अधिकारियों के नाम पर भेंट देते है उसके बाद दूसरे नम्बर पर इंजीनियर बड़े एवं छोटे साहब मिलकर 08 प्रतिशत अधिकार के स्वरूप में लेते है, तीसरे नम्बर पर सचिव महोदय आते है वह भी मेरी नोकरी खतरे में है मुझे एवं रोजगार सहायक के नाम पर 13 प्रतिशत ईमानदारी के नाम पर लेते है, चौथे नम्बर पर सरपंच साहब पूर्व के चुनाव एवं 2027 में होने वाले चुनावों के नाम पर 39 प्रतिशत लेते है उसके बाद बचने वाली शेष 25 प्रतिशत धन राशि पंचायत के विकास में खर्च की जाती है यह किसी एक पंचायत की कहानी नहीं है बल्कि 90 प्रतिशत से भी अधिक पंचायतों की कहानी है हमारे पास कोलारस एवं बदरवास जनपद पंचायत के आंकड़े सूत्रों से प्राप्त हुये है जिले में करीब 612 के आस पास पंचायतों में से किसी भी एक पंचायत में एक वर्ष के दौरान खर्च हुई राशि की यदि मजिस्ट्रेट जांच करा ली जाये तो सच्चाई सामने आ जायेगी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की गठजोड़ के कारण सभी मौन साधे हुये है जहां तक बड़े जनप्रतिनिधि वेचारे अपनी पार्टी के सरपंच अथवा जनदीकी सचिव होने के कारण सब जानते हुये भी जांच कराने में संकोच यानि की मौन साधने में अपने स्वयं के बोट बैंक को मजबूत करने के लिये भलाई समझकर पंचायतों के विकास की 75 प्रतिशत राशि का बटवारा होते हुये भी देख रहे हैै?


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