शिवपुरी - सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, शिवपुरी में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, उनकी प्रेरणादायी बाल लीलाओं, मनमोहक झांकियों, भजन एवं मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं ने पूरे विद्यालय परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध भागवताचार्य वासुदेव प्रसाद शर्मा जी (चौकी वाले) रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक पवन शर्मा ने की, जबकि विद्यालय के सह प्रबंधक जितेन्द्र परसाई विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया इसके पश्चात सरस्वती वंदना एवं प्रार्थना प्रस्तुत की गई विद्यालय के प्राचार्य लोकेंद्र सिंह मेवाड़ा ने मंचासीन अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया इस अवसर पर भैया सिद्धार्थ कौरव एवं प्रशांत धाकड़ ने श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए सह प्रबंधक जितेन्द्र परसाई ने कहा कि भारतीय संस्कृति के पर्व केवल उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जीवन में संस्कार, नैतिकता एवं आदर्शों की स्थापना करने का सशक्त माध्यम हैं भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म के मार्ग पर चलने, अन्याय का विरोध करने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं सुप्रसिद्ध भागवताचार्य वासुदेव प्रसाद शर्मा जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में अखिल ब्रह्मांड के महानायक भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय बढ़ गया तथा कंस के अत्याचारों से जनमानस त्रस्त हो उठा, तब धर्म की स्थापना और सज्जनों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के कारागार में जन्म लेने की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ वसुदेव जी उन्हें यमुना पार कर गोकुल में नंद बाबा के घर ले गए, जहां माता यशोदा की ममता की छांव में बालक कृष्ण का पालन-पोषण हुआ।
भागवताचार्य शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि बालक कृष्ण की माखन चोरी, गोप-गोपियों के साथ बाल सुलभ क्रीड़ाएं, पूतना वध, शकटासुर एवं तृणावर्त का संहार तथा कालिया नाग का मर्दन केवल कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें गहरे जीवन मूल्य और प्रेरणादायी संदेश छिपे हुए हैं भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी प्रत्येक लीला के माध्यम से असत्य और अत्याचार पर सत्य एवं धर्म की विजय का संदेश दिया।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, करुणा, साहस, कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाता है। श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल में जहां अपनी लीलाओं से सभी के हृदयों को आनंदित किया, वहीं आगे चलकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर संदेश देकर सम्पूर्ण मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। उन्होंने विद्यार्थियों से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को संस्कारवान, अनुशासित एवं समाजोपयोगी बनाने का आह्वान किया।
इस दौरान वासुदेव प्रसाद शर्मा जी द्वारा प्रस्तुत किए गए मनमोहक श्रीकृष्ण भजनों ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं आचार्य परिवार को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता बनी विशेष आकर्षण का केंद्र
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर विद्यालय में मटकी फोड़ कार्यक्रम एवं कक्षावार मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साह एवं जोश के साथ भाग लेते हुए अपने दमखम और साहस का प्रदर्शन किया तथा मटकी फोड़कर उपस्थित जनसमूह का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक पवन शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का बाल जीवन केवल आनंद और उत्सव का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष, एकता और आत्मविश्वास की प्रेरणा भी देता है मटकी फोड़ जैसे आयोजन विद्यार्थियों में टीम भावना, परस्पर सहयोग, नेतृत्व क्षमता, साहस एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने की भावना विकसित करते हैं।
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल व्यक्तिगत क्षमता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सामूहिक प्रयास और एक-दूसरे के सहयोग से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं जिस प्रकार मटकी तक पहुंचने के लिए सभी विद्यार्थी मिलकर प्रयास करते हैं, उसी प्रकार जीवन में भी एकता, अनुशासन और परिश्रम से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है मटकी फोड़ कार्यक्रम में आचार्य परिवार द्वारा प्रस्तुत मटकी फोड़ प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे देखकर विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय के छात्र नकुल चौधरी एवं जसराम धाकड़ द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सस्वर एवं भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने श्रद्धापूर्वक सुना।
इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का आकर्षक मंचन किया गया, जिसने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य पुरुषोत्तम शर्मा ने किया अंत में विद्यालय के प्राचार्य लोकेंद्र सिंह मेवाड़ा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य, दीदी एवं छात्र उपस्थित रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव ने विद्यालय परिसर को भक्ति, श्रद्धा, उत्साह एवं भारतीय संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
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