मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सरकार और भाजपा संगठन के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की कड़ी नाराजगी के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि उन्हें मामले की जानकारी मिल गई है और उन्होंने मुख्य सचिव से इस पर रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान का कड़ा रुख और धरना
रविवार को हुई इस कार्रवाई के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे और उनके साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव राहत देने की बात कही। शिवराज ने कहा कि वे दिल्ली से भोपाल लौटने के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
देर रात तक धरने पर बैठे शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत में इसे "जुल्म की पराकाष्ठा" करार दिया। उन्होंने कहा:
आदिवासियों के परिवारों की सिसकियां, आंखों के आंसू, उनके कुचले हुए खेत और चौपट किए गए भविष्य की पूरी जानकारी वे मुख्यमंत्री को देंगे।
उन्होंने आशंका जताई कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव को बदनाम करने की एक गहरी साजिश हो सकती है।
शिवराज ने जोर देकर कहा कि ये वही आदिवासी परिवार हैं जो हमेशा से भाजपा को वोट देते आए हैं और जिनके समर्थन से पार्टी के नेता तथा मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं।
उन्होंने बताया कि कार्रवाई से पहले उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया था कि ये परिवार वर्षों से वहां रह रहे हैं, इसलिए उन्हें परेशान न किया जाए, इसके बावजूद यह कदम उठाया गया।
वन विकास निगम का पक्ष
दूसरी ओर, राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल ने इस कार्रवाई को सही ठहराया है। उनके अनुसार:
आरक्षित वन कक्ष 426 की यह जमीन वर्ष 2021 में वन विभाग से वृक्षारोपण के लिए निगम को प्राप्त हुई थी।
निगम का दावा है कि उस समय वहां कोई अतिक्रमण नहीं था और लगभग 135 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया था।
वर्ष 2022 में सिंहपुर गांव के कुछ लोगों द्वारा लगभग 32 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर अतिक्रमण कर लिया गया, जिसके बाद वर्ष 2024 में वन अपराध के प्रकरण दर्ज किए गए।
निगम के मुताबिक, प्रभावित लोगों को 4 दिसंबर 2025 और फिर 7 सितंबर 2026 को बेदखली के नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद रविवार को करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाते हुए छह अस्थायी झोपड़ियां हटाई गईं।
आदिवासियों के दावे और दस्तावेजों की स्थिति
प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे इस भूमि पर लंबे समय से निवास कर रहे हैं। कुछ परिवारों ने वर्ष 1986 और 1995 की पट्टे की रसीदें होने का दावा भी किया है। हालांकि, मामले में कब्जे की अवधि और दावों की सत्यता जांच का विषय बन गई है। सेटेलाइट इमेज के आधार पर भी वर्ष 2021 और नवंबर 2022 की स्थिति में अंतर देखा जा रहा है। अब आधिकारिक जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही इस विवाद की असली तस्वीर सामने आ सकेगी।
विपक्षी दलों को मिला मुद्दा और राजनीतिक अटकलें
अपनी ही पार्टी की सरकार के अधिकारियों और इस कार्रवाई पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका मिल गया है। विपक्षी नेता आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा चुनाव के वक्त आदिवासी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच संबंधों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं।
