मृत कर्मचारी का पद संपत्ति नहीं, उत्तराधिकार के आधार पर नहीं मिलेगी नौकरी; हाईकोर्ट का फैसला - Gwalior




मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अमित सेठ की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। यह सरकार की लागू नीति और निर्धारित पात्रता शर्तों पर निर्भर करती है। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को उत्तराधिकार कानून के तहत कर्ज या प्रतिभूति मानने से भी इनकार किया है।

वसीयत या उत्तराधिकार से नहीं मिलेगा नियुक्ति का अधिकार

हाई कोर्ट ने इस सिद्धांत के आधार पर ग्वालियर के चतुर्थ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश द्वारा 23 अप्रैल 2010 को दिए गए आदेश के उस हिस्से को रद्द कर दिया, जिसमें मृत कर्मचारी की माता और बहन को अनुकंपा नियुक्ति पाने का पात्र माना गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत, प्रोबेट या उत्तराधिकार से जुड़ी किसी भी कार्यवाही के जरिए कोई व्यक्ति अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार हासिल नहीं कर सकता। संबंधित पक्षों के बीच आपसी सहमति या समझौता होने की स्थिति में भी अदालत ऐसा अधिकार प्रदान नहीं कर सकती।


आर्थिक संकट में तत्काल राहत देना उद्देश्य

अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रित परिजनों को अचानक उत्पन्न आर्थिक संकट से तत्काल राहत देना है। यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं है और न ही मृत कर्मचारी की सेवा का हस्तांतरण है।

कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके पद को संपत्ति की तरह उत्तराधिकारियों के बीच बांटना उचित नहीं है। इसलिए अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदक को सरकार की लागू नीति में निर्धारित शर्तों और पात्रता को पूरा करना होगा। वसीयत, प्रोबेट, पारिवारिक समझौते या उत्तराधिकार के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता।

मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-

  • उत्तराधिकार या संपत्ति का अधिकार नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को मिलने वाली कोई पैतृक संपत्ति या वसीयत की तरह उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है।

  • वसीयत या समझौते का असर नहीं: वसीयत, प्रोबेट, पारिवारिक समझौते या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) के आधार पर किसी को अनुकंपा नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल सकता, भले ही परिवार के बीच आपसी सहमति क्यों न हो।

  • पात्रता और नीतियां सर्वोपरि: अनुकंपा नियुक्ति पूरी तरह से सरकार द्वारा बनाई गई संबंधित नीतियों और निर्धारित पात्रता शर्तों पर निर्भर करती है।

  • तत्कालिक राहत का उद्देश्य: अदालत ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य कर्मचारी की अचानक मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को तुरंत आने वाले आर्थिक संकट से उबारना है, न कि यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प या सेवा का हस्तांतरण है।


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