गांधी पेट्रोल पंप विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जय भारत ऑटोमोबाइल्स की SLP खारिज, 60 साल पुरानी लीज का है मामला - Shivpuri

60 साल पुरानी लीज का विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, 6 अक्टूबर को याचिका खारिज होने के बाद नगर पालिका की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

शिवपुरी। झांसी तिराहे स्थित गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर नगर पालिका परिषद शिवपुरी और मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स के बीच चल रहा करीब छह दशक पुराना लीज विवाद अब एक और महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पर पहुंच गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के 1 सितंबर 2026 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची SLP (Civil) No. 35025/2026 को 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, याचिका पर न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरैश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।

1960 की लीज से शुरू हुआ था विवाद

मामले की जड़ 23 जुलाई 1960 को हुई उस लीज से जुड़ी है, जिसके तहत आगरा-बॉम्बे रोड स्थित जमीन 25 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर दी गई थी। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक लीज की अवधि समाप्त होने के बाद लीजधारक की ओर से नवीनीकरण के लिए आवेदन और किराया जमा करने के आधार पर लीज जारी रहने का दावा किया गया था।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 1 सितंबर के अपने फैसले में कहा था कि केवल नवीनीकरण का आवेदन करने से लीज स्वतः नवीनीकृत नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी माना कि एक वर्ष से अधिक अवधि की लीज के नवीनीकरण के लिए पंजीकृत दस्तावेज आवश्यक है। फैसले में परिसर को अन्य व्यक्तियों द्वारा व्यावसायिक उपयोग किए जाने से जुड़े सब-लेटिंग के पहलू पर भी विस्तार से विचार किया गया।

हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ जय भारत ऑटोमोबाइल्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह याचिका 6 अक्टूबर को खारिज कर दी गई। इसके बाद अब इस विवाद में नगर पालिका की ओर से जमीन पर कब्जा लेने की प्रस्तावित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।

कार्रवाई को लेकर पहले भी हुआ था विवाद

हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर पालिका का अमला गांधी पेट्रोल पंप की जमीन पर कार्रवाई के लिए पहुंचा था। इस दौरान कार्रवाई का विरोध हुआ और मौके पर काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार नगर पालिका की टीम जेसीबी लेकर पहुंची थी, लेकिन विरोध के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

अब नगर पालिका के सामने अगला कदम क्या?

सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद अब शहर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पालिका प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। क्या जमीन खाली कराने की कार्रवाई तत्काल आगे बढ़ेगी या प्रशासन पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति और विधिक राय के आधार पर अगली प्रक्रिया तय करेगा—इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

हालांकि, SLP खारिज होना अपने आप में किसी विशेष प्रशासनिक कार्रवाई की समयसीमा तय नहीं करता। जमीन का वास्तविक कब्जा लेने की प्रक्रिया संबंधित अदालती आदेशों, नगर पालिका की कार्रवाई और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।

छह दशक पुराने विवाद का नया मोड़

करीब छह दशक से चले आ रहे इस विवाद में हाईकोर्ट के फैसले और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद मामला निर्णायक चरण में दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन अदालतों में मिले कानूनी आधार के बाद जमीन को लेकर आगे क्या कार्रवाई करते हैं।

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