लोक अदालत की मेंबर बनीं पंजाब की पहली ट्रांसजेंडर मोहिनी

लोक अदालत की मेंबर बनीं पंजाब की पहली ट्रांसजेंडर मोहिनी, किन्नरों की दशा व बेहतरी पर करेंगी पीएचडी नई दिल्ली- नेशनल लोक अदालत की मेंबर बनी पंजाब की पहली ट्रांसजेंडर मोहिनी अब अपने समाज के लोगों की दशा-दिशा पर पीएचडी करने की तैयारी कर रही हैं। राजस्थान में झुंझनूं के एक छोटे से गांव में जन्मीं मोहिनी तकरीबन 9 साल से लुधियाना में रह रही हैं। पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेज्युएट, सोशल वर्क में मास्टर डिग्री कर चुकी मोहिनी जुरिस्ट बनने के बाद भी अपने समाज से जुड़ी हुई हैं। बधाइयां मांगना, डेरे में सेवा करना सब कुछ पहले की तरह ही है। वह किन्नर समाज के लोगों के लिए एक सोसाइटी भी चला रही हैं। वह कहती हैं कि किन्नरों को स्वरोजगार की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं ताकि पेट पालने के लिए किसी को गलत काम न करना पड़े।12-13 साल की उम्र में मेरे शरीर में कुछ बदलाव आने लगे थे जो बाकी लड़कों से अलग थे। मेरे कपड़े जरूर लड़कों वाले थे, लेकिन हाव-भाव और चाल लड़कियों जैसी होती जा रही थी। लड़कों के बीच मैं असहज महसूस करने लगी थी। जल्द ही घर वालों को पता चल गया कि मैं किन्नर हूं तो उन पर मानो मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा। सारा समाज एकाएक मेरा दुश्मन सा हो गया। दोस्त छूटे, स्कूल छूटा, घर-परिवार भी। मैं तब 7वीं क्लास में पढ़ती थी। लड़के मेरा उत्पीड़न करने लगे और यह कई बार वायलेंस का रूप लेने लगी। जीना मुश्किल हो गया था, मेरे सामने किन्नर समाज में शामिल होने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। वहां मुझे एक दोस्त मिला, उसने मुझे नाचना-गाना और बधाई मांगना सिखाया। मैंने अपना पेट पालने के साथ पढ़ाई भी जारी रखी। समाज के बहुत लोगों को यह अच्छा नहीं लगता था, लेकिन चोरी-छिपे कभी कैंडल लाइट में और कभी नहर किनारे बैठकर पढ़ाई करती रही। हायर सेकेंडरी प्राइवेट करने के बाद डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए बीए, एमए पूरा किया। मैं खुश थी कि शायद अब मुझे कोई छोटी-मोटी नौकरी मिल जाएगी। लेकिन इंटरव्यू में सेलेक्ट होने के बावजूद भी किन्नर को कोई नौकरी देने का तैयार नहीं था। मुझे पर मर्दाना वेश-भूषा अपनाने का दबाव बनाया जाता। इसी सब के बीच 2009 में मैं लुधियाना आ गई। यहां भी समाज एक किन्नर को स्वीकार करने को तैयार नहीं था, लेकिन कुछ अच्छे लोगों ने साथ दिया और मैं बन्तो हाजी (मेरी दादी गुरु) के डेरे से जुड़ गई। यहीं से 2011 में एलजीबीटी (सेक्सुअल माइनॉरिटीज) कम्युनिटी के हकों की लड़ाई के लिए ‘मनसा फाउंडेशन वेलफेयर सोसाइटी’ का गठन किया। सोसाइटी के एक सेमिनार में लुधियाना के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज गुरबीर सिंह और सीजेएम गुरप्रीत कौर से मुलाकात हुई। उन्होंने ही मुझे प्रेरित किया और नेशनल लोक अदालत का सदस्य मनोनीत कराने में मदद की।

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