हरीश भार्गव - शीलकुमार यादव - मध्य प्रदेश में गठबंधन के साथ कांग्रेस की सरकार काबिज हो चुकी है ग्वालियर एवं चंबल संभाग में कांग्रेस को रिकॉर्ड तोड सीटे जीतने में कांग्रेस पार्टी सफल रही है। क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी उत्साह दोनो संभागो में सीटे देख कर दो गुना हो गया किन्तु मुख्यमंत्री न बन पाने की कसक सिंधिया को रही उससे भी ज्यादा टसक सिंधिया को कोलारस विधानसभा सीट में मिली हार की रही। कोलारस विधानसभा सीट पर सिंधिया को पूरा विश्वास था कि कोलारस सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी क्योकि सिंधिया ने जिन विधानसभा सीटो पर अपने समर्थको को टिकिट दिलवायें उनमें महेन्द्र यादव चहेतो की सूची में टॉप 10 नही बल्कि 1 नम्बर पर स्थान सिंधिया के दिल में रखने बालो में सुमार है। यही कारण रहा कि सिंधिया को मुख्यमंत्री न बन पाने की जितनी टेंशन रही उसी के बराबर कोलारस विधानसभा हार की भी टेंशन सिंधिया के दिमाग में कम होने का नाम नही ले रही है। क्योकि कोलारस विधानसभा हार के बाद पोलिंग न जिता पाने बाले कार्यकर्ताओ को हैलीपेड से लेकर मीटिंगो में सिंधिया अपनी नाराजगी कार्यकर्ताओ के ऊपर कई बार जता चुके है। महेन्द्र यादव भले ही कोलारस से चुनाव हार गये हो किन्तु उनकी हार के बाद कई कांग्रेसियो की वाट एवं महेन्द्र यादव को आने बाले समय में वेहतर स्थान मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। कोलारस विधानसभा चुनाव की हार के बाद क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पोलिंग न जिता पाने बाले कार्यकर्ताओ को फटकार लगाने के साथ साथ उनके कद घटाने अथवा उन्हे अहसास कराने के लिए उनके सामने दूसरे कार्यकर्ताओ उनकी बरावरी पर लाकर उन्हे अहसास कराने के साथ साथ पोलिंग हराने बाले कार्यकर्ताओ को ब्लॉक अध्यक्ष तक से हटाया जा चुका है। अभी लोकसभा चुनाव में ज्यादा समय नही है लोकसभा चुनाव के बाद पोलिंग न जिता पाने बाले कार्यकर्ताओ तथा बागी कांग्रेसियो पर सिंधिया की तलवार गरजेगी इसकी संभावनायें इशारे ही इशारो में नजर आ रही है।
वो एक और तुम अनेक होने के बाद भी खाली हाथ आखिर कैसे लौटे
कोलारस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद जब कोलारस के कार्यकर्ता कांग्रेस की सरकार बनने पर क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री या प्रदेश अध्यक्ष बनाने तथा प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के लिए जब सांसद सिंधिया का स्वागत करने पहुंचे तब सांसद सिंधिया ने कोलारस , बदरवास के कांग्रेसी कार्यकर्ताओ से पहले मिलना ही उचित नही समझा उसके बाद जब दुवारा कांग्रेसी सामने आये तो सिंधिया ने फटकार लगाते हुये कांग्रेस के करीब आधा दर्जन प्रमुख कार्यकर्ताओ से पूछा कि सामने एक आदमी और तुम अनेक फिर भी खाली हाथ क्या सोच कर आये थे कि सिंधिया तुम्हे ईनाम देगा। सिंधिया की फटकार शोले फिल्म के गब्बर सिंह की तरह कोलारस के कांग्रेसी कार्यकर्ताओ के ऊपर दिखाई दी। जिसमें गब्बर सिंह अपने साथियो को खाली हाथ लोटने पर फटकार लगाता है। उसी अंदाज में सिंधिया गरजे और उसका असर भले ही हल्के रूप में सही दो कांग्रेसियो पर दिखाई दिया। जबकि शेष पर असर लोकसभा चुनाव के बाद दिखाई दे सकता है। खाली हाथ यानि पोलिंग न जिता पाने तथा बागी तेवर अपनाने बाले कांग्रेसियो को आने बाले समय में सिंधिया सवक सिखाने में पीछे रहने बाले नही है। यदि इसके उदाहरण देखना है तो 238 मतो से चुनाव हराने बाले कांग्रेसियो को देवेन्द्र जैन के चुनाव जीतने के बाद या तो पार्टी या पद दोनो में से हाथ धोना पडा था यही कार्य पोलिंग हराने या बागी तेवर अपनाने बाले कांग्रेसियो को सिंधिया के कोप भाजन का शिकार शोले फिल्म में गब्बर सिंह की तरह आने बाले समय में भुगतने के लिए तैयार रहने की संभावनाये दो कांग्रेसियो के कद घटाने के साथ दिखाई देने लगे है।
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