दगावाज कांग्रेसी नही बल्कि महल के विश्वास पर मिलती रही है सिंधिया परिवार को जीत




गुना लोकसभा क्षेत्र के लिए 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में मौजूद है जिनके लिए तीन जिलो के अंतर्गत आने बाली 8 विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आगामी पांच वर्ष के लिए लोकसभा क्षेत्र का प्रथम नागरिक यानि कि सांसद के लिए मतदान ठीक पन्द्रवे दिन करेगें। गुना लोकसभा क्षेत्र से भले ही 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में मौजूद हो किन्तु मुख्य मुकावला कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं भाजपा के केपी यादव तथा बसपा के किरार लोकेन्द्र सिंह के बीच ही दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में कांग्र्रेस की सरकार तथा महल के अपराजेय प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव मैदान में भले ही मजबूत प्रत्याशी के रूप में दिखाई दे रहे हो किन्तु भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को भी भाजपा वोट बैंक, सजातिय बोट बैंक, मोदी लहर के कारण भाजपाई मजबूत स्थिति में मानकर चल रहे है। वहीं बसपा प्रत्याशी किरार लोकेन्द्र सिंह की हम बात करें तो लोकेन्द्र सिंह किरार समाज के अलावा बसपा के मूल वोट बैंक एससी वोट बैँक के सहारे चुनाव मैदान में कई माह पूर्व से मतदाताओ के घर-घर जाकर चक्कर काट रहे है। देखना है किरार लोकेन्द्र सिंह अपने समाज के अलावा बसपा के मूल वोट बैंक को अपने पक्ष में कर पाने में कामयाब हो पाते है अथवा पूर्व के लोकसभा चुनावो की तरह इस बार भी बसपा मुकावले में आना तो दूर की बात है कहीं जमानत बचाने के लिए संघर्ष न करना पड जाये। चव


विधानसभा चुनाव में दगावाजी करने बाले कांग्रेसी आ रहे है सबसे आगे नजर
गुना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में मौजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया उत्तर प्रदेश के साथ साथ अपने गुना लोकसभा क्षेत्र में भी काफी मेहनत कर रहे है सिंधिया ही नही उनके परिजन  तथा सिंधिया से जुडे लोग भी दूर -दूर से आकर गुना लोकसभा क्षेत्र में गांव गांव , हर घर पहुंच कर मतदाताओ से सिंधिया को जिताने की अपील करने में जुटे हुये है। इसी बीच मतदाताओ के बीच से एक बात बार-बार निकल कर सामने आ रही है कि कांगे्रस के चंद दगावाज कांग्रेसी जिन्होने विधानसभा के चुनाव में भाजपा को जिताने के लिए वोट मांगे थे आज वही कांगे्रसी सिंधिया के आगे पीछे घूम कर कांग्रेस के लिए वोट मांग रहे है। क्या सिंधिया ऐसे कांग्रेसियो को लोकसभा चुनाव के बाद सवक सिखायेगे अथवा लोकसभा का परिणाम आने के बाद पूर्व के तीन चुनावो की तरह दगावाज कांग्रेसियो को आगे भी दगा करने के लिए छोड देगे। यह सवाल बार-बार मतदाताओ के बीच से निकल कर सामने आ रहा है। कि किस प्रकार दो बार विधानसभ तथा एक बार जिला पंचायत के चुनावो में दगावाज कांग्रेसियो ने दाम लेकर कांग्रेस एवं सिंधिया की छवि को कोलारस बदरवास क्षेत्र के कांग्रेसियो ने धूमिल किया था। लोकसभा का परिणाम सभी लोग भली भांति जानते है किन्तु दगावाजो पर कांग्रेस इसी तरह दया दिखाती रही तो आने बाले चुनावो में कांग्रेस को आगे भी मुंहकी खानी पड सकती है। 


सिंधिया के पूर्व चेला केपी क्या दे पायेगे पूर्व गुरू को चुनौती
गुना लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूर्व सहयोगी रहे केपी यादव को चुनाव मैदान में उतारा है केपी यादव को चुनाव मैदान में उतारने के पीछे भाजपा के लोग जो कहानी वयां कर रहे है उनके अनुसार केपी यादव पार्टी वोट बैँक के अलावा यादव समाज के वोट बैँक को भी अपनी ओर खींचने में सफल होंगे। यादव समाज का वोट बैंक कांग्रेस के साथ अभी तक रहा है भाजपा की चाल पर यादव समाज का वोट बैंक केपी यादव को मिलेगा इसको लेकर हमें इंतजार करना होगा किन्तु यह तय है कि विधानसभा के चुनाव में केपी यादव सिंधिया के सिपाही को प्रदेश में सरकार होने के बाद भी मात नही दे पाये क्या वहीं केपी यादव लोकसभा में अपने पूर्व गुरू सिंधिया को चुनौती यानि कि टक्कर दे पायेगे इसको लेकर कयासो का दौर जारी है। जहां तक यादव समाज के वोट बैंक का सवाल है यादव समाज का वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में रहा है और कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया के नामांकन फार्म के दौरान आधे से अधिक यादव समाज के नेता कांग्रेस की रेली में दिखाई दिये यदि यादव समाज का वोट बैंक साधने में केपी यादव सफल नही हो पाये तो उन्हे चुनाव मैदान में अपने पूर्व गुरू सिंधिया के हाथो करारी शिकस्त झेलनी पड सकती है। और यदि जिस यादव समाज को वोट बैंक काटने के लिए भाजपा ने केपी यादव की चाल चली है उसमें केपी यादव सफल हुये तो लोकसभा का मुकावला कडा हो सकता है। 

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