कोलारस का सर्वाधिक बुद्धिजीवी वर्ग वर्षों से त्रासदी का शिकार हो रहा है।भीषण गर्मी में वह आज मजबूर है एक घटिया स्तर के शेड में बैठने के लिए जिसमे गर्म हवा और लू के थपेडे मिलकर लोहे की टीन शेड के तापमान में 04 डिग्री का इजाफा करते हुए 44 के स्थान पर 48 पर पहुचा देते हैं।पीडित और शोषित जनो की सेवा कर उन्हें न्याय दिलाने वाले आज खुद ही न्याय की तलाश में हैं वकीलों के लिए शेड के स्थान पर एक पक्की छत का निर्माण किया जाना अनिवार्य आवश्यकता है क्यों कि गर्मी बरसात व सर्दियों में इस चारो और से खुले स्थान पर बैठ कर वकालत करना किसी अचरज से कम नही है।इस शेड के पहले यह वकील दरख्तों के नीचे बैठते थे लगभग 25 वर्ष पूर्व यहाँ इस टीन शेड का निर्माण हुआ । किन्तु अब चारों ओर विकाश हो रहा है लेकिन यहाँ विधिवेत्ताओ को सुविधाओं से वंचित रखा गया है राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष संतोष कुमार गौड एडवोकेट ने वकीलों के हक के लिए आवाज उठाते हुए प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की और आकृष्ट कराया है।उन्होंने बताया ऐसी भीषण गर्मी में टीन शेड पशुओं के लिए भी सुरक्षित नही है इस भीषण गर्मी के दौर मे अधिवक्ताओ की हालात देखकर लोग आश्चर्य चकित हो जाते हैं। यहाँ वकीलों के साथ साथ पक्षकारों के लिए इस शेड में भारी परेशानी उठाते हुए बमुश्किल गुजर करना पडता है
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