राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार प्रदेश में आगामी नेशनल लोक अदालत का आयोजन शनिवार 14 सितम्बर को किया जाएगा। इसमें दीवानी एवं आपराधिक शमनीय मामलों सहित सभी प्रकार के मामले रखे जाएंगे, जिनमें पक्षकारगण सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सुलह एवं सहमति से प्रकरणों का निराकरण कराने हेतु प्रयास कर सकेंगे। नेशनल लोक अदालत उच्च न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों और तालुका न्यायालयों, श्रम न्यायालयों, कुटुम्ब न्यायालयों में आयोजित की जाएगी।
इस नेशनल लोक अदालत हेतु राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा केटेगिरीवाइज चिन्हित किए गए विभिन्न न्यायालयों में रखे जाने वाले लंबित एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में न्यायालयों में रखे जाने वाले लम्बित प्रकरणों में आपराधिक शमनीय प्रकरण, पराक्राम्य अधिनियम की धारा 138 अन्तर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले शामिल हैं। इसके अलावा एम.ए.सी.टी. प्रकरण (मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरण), श्रम विवाद प्रकरण, विद्युत एवं जल कर व बिल संबंधी (सिर्फ शमनीय प्रकरण), वैवाहिक प्रकरण, भूमि अधिग्रहण के प्रकरण, सेवा मामले जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित हैं, राजस्व प्रकरण (सिर्फ जिला व उच्च न्यायालयों में लंबित), दीवानी इत्यादि मामले महत्वपूर्ण है। इसके अलावा प्रीलिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) के अंतर्गत पराक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले, श्रम विवाद संबंधी मामले, विद्युत एवं जल कर व बिल संबंधी सिर्फ शमनीय प्रकरण, वैवाहिक प्रकरण, दीवानी इत्यादि मामले महत्वपूर्ण हैं।
आमजन व पक्षकारगण से आग्रह किया गया है कि वे अपने न्यायालय में लंबित एवं मुकदमेंबाजी के पूर्व (प्रीलिटिगेशन प्रकरण) चिन्हित किये गये प्रकरणों व विवादों का उचित समाधान कर, आपसी सहमति से लोक अदालत में निराकरण कराना चाहते हैं। वे संबंधित न्यायालय अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से सम्पर्क कर अपना मामला नेशनल लोक अदालत में रखे जाने हेतु अपनी सहमति व आवश्यक कार्यवाही यथाशीघ्र पूर्ण कराएं और नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।
इस नेशनल लोक अदालत हेतु राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा केटेगिरीवाइज चिन्हित किए गए विभिन्न न्यायालयों में रखे जाने वाले लंबित एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में न्यायालयों में रखे जाने वाले लम्बित प्रकरणों में आपराधिक शमनीय प्रकरण, पराक्राम्य अधिनियम की धारा 138 अन्तर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले शामिल हैं। इसके अलावा एम.ए.सी.टी. प्रकरण (मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरण), श्रम विवाद प्रकरण, विद्युत एवं जल कर व बिल संबंधी (सिर्फ शमनीय प्रकरण), वैवाहिक प्रकरण, भूमि अधिग्रहण के प्रकरण, सेवा मामले जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित हैं, राजस्व प्रकरण (सिर्फ जिला व उच्च न्यायालयों में लंबित), दीवानी इत्यादि मामले महत्वपूर्ण है। इसके अलावा प्रीलिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) के अंतर्गत पराक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले, श्रम विवाद संबंधी मामले, विद्युत एवं जल कर व बिल संबंधी सिर्फ शमनीय प्रकरण, वैवाहिक प्रकरण, दीवानी इत्यादि मामले महत्वपूर्ण हैं।
आमजन व पक्षकारगण से आग्रह किया गया है कि वे अपने न्यायालय में लंबित एवं मुकदमेंबाजी के पूर्व (प्रीलिटिगेशन प्रकरण) चिन्हित किये गये प्रकरणों व विवादों का उचित समाधान कर, आपसी सहमति से लोक अदालत में निराकरण कराना चाहते हैं। वे संबंधित न्यायालय अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से सम्पर्क कर अपना मामला नेशनल लोक अदालत में रखे जाने हेतु अपनी सहमति व आवश्यक कार्यवाही यथाशीघ्र पूर्ण कराएं और नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।
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मध्यप्रदेश