डेंगू से बचाने हेतु सावधानी बरतना आवश्यक

शिवपुरी/ डेंगू वायरस जनित संक्रामक रोग है, जो डेंगू संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में संचारी होता हैं। यह रोग संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन के समय प्रायः सुबह व शाम के समय काटता है। एडीज मच्छर के काटने से बचाव व संक्रमित मच्छरों के लार्वा का विनिष्टीकरण ही इसका एकमात्र उपाय हैं। एक बार शरीर में डेंगू वायरस का संक्रमण होने के बाद डेंगू बुखार के लक्षण 5-6 दिन पश्चात् प्रकट होते हैं। इस हेतु घबराने की जरूरत नहीं होती हैं इस अवस्था में रोगी को मच्छरदानी में पूर्ण आराम करने व जल-उपचार (जैसे-शिकंजी, नीबु पानी, ओआरएस, नारियल पानी, ग्लुकोस इत्यादि के द्वारा शरीर में जल की पूर्ति) करने की सलाह दी जाती हैं। 
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजनों को सलाह दी गई है कि डेंगू से बचाव के लिये डेंगू मच्छर के लार्वा घर के साफ पानी में पनपते है, घरों में लंबे समय तक बर्तनों में जल संग्रह ना करें, कुलर की पुरानी घास जला दें क्योंकि पुरानी घासों में डेंगू मच्छर का अंडे सूखी अवस्था में भी जीवित रहते है तथा कुलर का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य ही खाली करें, घर के अंदर रखें बर्तनों, पक्षियों के सिकोरों व मवेशियों को पानी पिलाने के टंकियों व कंटेनरों की साफ सफाई रखें, घर के आसपास पानी जमा न होने दे निकासी की व्यवस्था करे निकासी न होने पर उसमें जला हुआ तेल, कैरोसीन डाल दें। संक्रमण काल को देखते हुये स्वयं एवं स्कूली बच्चों को फुल आस्तीन के कपडें पहनायें क्योंकि बच्चों में प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होने के कारण यह सबसे पहले बच्चों को अपना शिकार बनाता हैं। घर की खिडकियों दरवाजों पर मच्छरप्रूफ जाली लगायें तथा घर में मच्छर भगाने वाली मेट ,काइल, लिक्विड का उपयोग अवश्य करे तथा सोते समय मच्छरदानी लगायें।
डेंगू बीमारी के लक्षण
सामान्य प्रकार के डेंगू में तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे की ओर दर्द, शरीर पर लाल चकते या दाने, जोडों व मांसपेशियों में दर्द होना दिखाई देता हैं। जब डेंगू घातक अवस्था में पहुँचता है तो उक्त लक्षणों के साथ-साथ मसुडों व आंतों से रक्त स्त्राव का होना अथवा खून में प्लेटलेट का कम होना लक्षण पाये जाते है इसमें तत्काल मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार लेना चाहिये।

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