मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं तोमर, शिवराज और नरोत्तम के नाम

Narendra Singh Tomar, Jyotiraditya Scindia, Shivraj Singh Chouhan Union Minister and VD Sharma

सार

  • ज्योतिरादित्य से अभी स्थानीय स्तर पर नेता नहीं ले रहे हैं कोई राय
  • तोमर के नाम पर नहीं होगी कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह को आपत्ति
  • शिवराज के रास्ते में सबसे बड़ा कांटा उनका 13 साल तक राज्य का मुख्यमंत्री रहना है

विस्तार

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभी को स्वीकार नेता नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पहली पसंद केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हैं। भाजपा के नेता नरोत्तम मिश्रा की भी महत्वाकांक्षा है और उनके शुभ चिंतकों की कमी नहीं है। भाजपा में राज्य के मुख्यमंत्री को लेकर अब हलचल काफी तेज है।

शिवराज के सिवा आखिर कौन?

भाजपा के एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि शिवराज को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। उनकी जानकारी के मुताबिक तैयारी भी इसी तरह की हैं। बताते हैं मध्यप्रदेश  में सबको स्वीकार तो नहीं लेकिन अधिकतम को स्वीकार नेता शिवराज सिंह ही हैं। राज्य में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राकेश सिंह, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का रास्ता थोड़ा अलग हैं।
बताते हैं हाल में भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया से अभी स्थानीय स्तर पर नेता कोई राय नहीं ले रहे हैं। हालांकि इसमें ज्योतिरादित्य की राय मायने रखेगी। समझा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य इसकी चर्चा केंद्रीय नेतृत्व से कर रहे हैं।

शिवराज के रास्ते में सबसे बड़ा कांटा उनका 13 साल तक राज्य का मुख्यमंत्री रहना है। यह अनुभव के लिहाज से ठीक है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व हमेशा नए नेताओं को अवसर देने और भविष्य का नेता तैयार करने को प्रमुखता देता है।

नरेंद्र तोमर भी क्या बुरे हैं?

केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर अच्छे नेता हैं। जमीनी पकड़ रखते हैं। सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी क्षमता को पसंद करते हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी तोमर के नाम को लेकर कोई आपत्ति नहीं है।

मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षाएं कैलाश विजयवर्गीय भी रखते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि तोमर के नाम पर उन्हें या फिर राकेश सिंह को कोई आपत्ति नहीं होगी। शीर्ष नेतृत्व हमेशा नए नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के पक्ष में रहता है। दूसरे, शीर्ष नेतृत्व को हमेशा केंद्र सरकार में अनुभवी लोगों की आवश्यकता रहती है।

नरोत्तम मिश्रा अच्छे उत्साही नेता हैं

नरोत्तम मिश्रा ब्राह्मण चेहरा हैं और राज्य में ब्राह्मण चेहरा लंबे समय से सत्ता में नहीं है। भाजपा का अच्छा जनाधार है, लेकिन नरोत्तम अभी इस दौड़ में पीछे हैं। उनके सहयोगी भी इस बारे में बहुत उत्साह से कुछ नहीं कह पाते।

भिंड, मुरैना में नरोत्तम मिश्रा अपनी पकड़ रखते हैं। नरोत्तम नहीं चाहते ग्वालियर चंबल संभाग से उनका प्रभाव किसी तरह से कम हो पाए। नरोत्तम ज्योतिरादित्य को बहुत पसंद नहीं कर रहे हैं। भाजपा को अभी सबके बीच में एक समीकरण बनाना है।

शनिवार को तय हो जाएगा नेता का नाम

भाजपा के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि राज्य के नए नेता का एलान शनिवार को सुबह तक हो सकता है। बताते हैं अभी राज्य में विधायकों का मन टटोलने की प्रक्रिया चल रही है।

भाजपा नेता मानकर चल रहे हैं कि मध्यप्रदेश में सरकार बनाने का रास्ता तो आसान है, लेकिन सरकार के कार्यकाल को पूरा कर पाने का रास्ता कठिन है। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व भी संभल कर कदम रख रहा है।

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