सूर्य ग्रहण के चलते रात्रि 10 बजे से सूतक प्रारम्भ, मोक्ष रविवार 2 बजे से पूर्व-पण्डित प्रेमनारायण


कोलारस- कोलारस के प्रमुख पण्डित प्रेमनारायण भार्गव डुगासरे वालों के अनुसार रविवार को सूर्य ग्रहण का स्पर्स लगना सुबह 10:09 मिनिट से प्रारम्भ हो कर दोपहर 1:43 मिनिट तक सूर्य ग्रहण काल रहेगा जिसके चलते ग्रहण का सूतक यानि की छाया शनिवार रात्रि 10:09 मिनिट से प्रारम्भ होकर रविवार 1:43 मिनिट तक ग्रहण का मोक्ष यानि की छूटना तक ग्रहण का सूतक रहेगा। अत: सूतक काल एवं ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे । लोग अपने घरों में रहकर भजन इत्यादि कर सकेंगे। ग्रहण का सूतक समाप्त होने पर मंदिर एवं घरों को साफ-स्वाच्छ करके भोजन इत्यादि बनाकर भगवान को भोग लगाने तथा पूजा पाठ के साथ दान इत्यादि करने से विशेष फल की प्राप्ती होती है। सूतक काल के दौरान मंदिरों में पूजा पाठ, यात्रा, नया कार्य, तथा सूर्य देव के दर्शन नहीं करने चाहिये केवल घरों में रहकर भजन इत्यादि कर सकते है। मोक्ष के बाद जलाश्य में स्नान, पात्र ब्राह्राण, मंदिर एवं गरीबों में दान तथा मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन एवं पूजा पाठ, हबन इत्यादि करने का विशेष पुन्य फल ग्रहण काल के उपरान्त करने से प्राप्त होता है।  

सूर्य ग्रहण काल एवं सूर्य ग्रहण के दौरान बचाब के उपाय 
अवधि - 03 घण्टे 28 मिनट्स 36 सेकण्ड्स सूर्यग्रहण और इसके प्रकार सरल भाषा में कहें तो जब पृथ्वी चंद्रमा व सूर्य एक सीधी रेखा में हों तो उस अवस्था में सूर्य को चांद ढक लेता है जिससे सूर्य का प्रकाश या तो मध्यम पड़ जाता है या फिर अंधेरा छाने लगता है इसी को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब पूर्णत: अंधेरा छा जाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढक़ लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा। खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढक़ पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण - वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।यह ग्रहण भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप एवं पूरे एशिया में देखा जा सकेगा। देहरादून, सिरसा तथा टिहरी कुछ प्रसिद्ध शहर हैं जहाँ पर वलयाकार सूर्यग्रहण दिखाई देगा। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनायेगी। इस सूर्य ग्रहण की सर्वाधिक लम्बी अवधि 0 मिनट और 38 सेकण्ड की होगी। वहीँ नई दिल्ली, चंडीग?, मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलौर, लखनऊ, चेन्नई, शिमला, रियाद, अबू धाबी, कराची, बैंकाक तथा काठमांडू आदि कुछ प्रसिद्ध शहर हैं जहाँ से आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

ग्रहों की खगोलीय स्थिति
इस दौरान छह ग्रह एक साथ वक्री स्वरुप में होंगेद्य वक्री होने का मतलब है कि ग्रहों की चाल उल्टी दिशा में चलनाद्य गुरु, बुध, शुक्र, शनि वक्री रहेंगे। इसके अतिरिक्त राहू-केतु तो हमेशा वक्री गति में ही रहते हैंद्य गुरु नीच के होंगेद्य मिथुन राशि और मृगिशरा नक्षत्र में ग्रहण लगेगाद्य इस समय मिथुन में राहू, बुध, सूर्य और अस्त चन्द्रमा होंगेद्य इस समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे बेहद अशुभ स्थिति तैयार होगीद्य साथ ही तीन ग्रह स्वराशि में स्थित होंगे - बुध मिथुन में, शुक्र वृषभ में और शनि मकर में रहेंगेद्य इसका सीधा असर सभी ब्रह्मांडीय तत्वों पर पडता हैद्य  कई दशकों बाद ऐसा संयोग बन रहा है। निश्चित रूप से 21 जून को मिथुन राशि में लगने वाला यह सूर्यग्रहण शुभ नहीं हैंद्य ग्रहण के कारण ग्रहों की ऐसी स्थिति विश्व भर के लिए चिंताजनक मानी जा रही है। वहीं प्राकृतिक आपदाओं के भी संकेत बताए जा रहे हैं, जिसमें तूफान, आंधी और महामारी होने के कारण जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ेगाद्य तीस दिनों के अंदर दो से ज्यादा ग्रहण पड़ रहे हों तो उसकी विध्वंसक क्षमता तीन गुना ज्यादा बढ़ जाती है (5 जून को चंद्र ग्रहण, 21 जून को सूर्य ग्रहण फिर 5 जुलाई को चंद्रग्रहण) ये तो तय है कि ग्रहण काल का असर देश-दुनिया के लिए अच्छा नहीं हैद्य इस दौरान मानव जाति के विरुद्ध घृणित अपराधों में वृद्धि होगीद्य धार्मिक कट्टरता में वृद्धि होगीद्य लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएंगेद्य आवश्यक वस्तुएं महंगी होने के कारण आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएंगीद्य रोजगार के अवसर कम होने से भुखमरी की स्थिति पैदा होगीद्य राष्ट्राध्यक्षों की मति भ्रष्ट होने से दुनिया के युद्ध में उलझने का खतरा बढ़ जाएगाद्य इन सभी घटनाओं के संकेत अभी से दिखने लगे हैंद्य ग्रहण काल में ब?े ग्रहों के वक्री होने से अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से मानवीय जीवन और धन संपत्ति की भारी हानि होने की आशंका रहती हैद्य यह ग्रहण ऐसे दिन होने जा रहा है जब उसकी किरणें कर्क रेखा पर सीधी पडेंगी। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बडा दिन और सबसे छोटी रात होती है। वैसे तो हम सामान्य जीवन में भी विभिन्न नियमो का पालन करते है परंतु सूतक के दौरान हमे विशेष सावधान रहने की जरुरत होती हैद्य इस अशुभ काल में प्रकृति अधिक संवेदनशील हो जाती हैद्य सूर्य ग्रहण में सूतक का प्रभाव 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण में सूतक का प्रभाव 9 घंटे पहले शुरू हो जाता हैद्य सूर्य ग्रहण क्या सावधानी बरतें: किसी भी प्रकार के व्यसन से बचेंद्य यदि तैयार भोजन बचा हो तो पहले से तो? गए तुलसी पत्ते को भोजन में डाल देंद्य आध्यात्मिक कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त समय हैद्य साधक मन्त्र जाप आदि करके समय व्यतीत करें द्य ग्रहण काल समाप्त होने पर स्नानादि करके यथासंभव दान-पुण्य करेंद्य सोच पूर्णत: सकारात्मक रखें। सामान्य दैनिक कार्य यथावत चलते रहेंगेद्य सबसे महत्वपूर्ण बात कि गर्वभती महिलाये , बच्चे , वृद्ध और बीमार व्यक्तियों के लिए भोजन लेना , शौचालय जाना , दवाई लेने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

सूर्यग्रहण के प्रभाव
समुद्र मंथन से निकले अमृत के बंटवारे से उत्पन्न विवाद आज भी मानव को ग्रहण के रूप में भुगतना पडता हैद्य ग्रहण का काल साधना के लिए श्रेष्ठ समय हैद्य सकारात्मक रहते हुए प्रभु स्मरण कर समय व्यतीत करने से शांति और समृद्धि मिलती है। यूँ तो सारा देश अभी असाधारण परिस्थितियों से गुजर रहा है। प्राकृतिक आपदाएं जैसे-आंधी, तूफान, भूकंप आदि चिंता का कारण बने हुए हैं, वहीँ कोविड-19 के कारण संकट और गहरा हो गया हैद्य  लॉक डाउन के कारण शिक्षा, वाणिज्य-व्यापार सभी ठप हो चुके हैं। चूँकि ये ग्रहण एक द्विस्वभाव राशि मिथुन में पड रहा है, इसिये इसके परिणाम अधिक कष्टकारी होंगेद्य कोरोना वायरस के कारण देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। लोगों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है, लेकिन बहुत थोडे लोगों को। ऐसे में ताजा रिपोर्ट और भी चिंताजनक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की वजह से कारोबार बंद होने से देश में 13. 6 करोड नौकरियों पर संकट आ सकता हैं। बड़ी संख्या में छंटनी होगी। इसकी सबसे अधिक मार पर्यटन और होटल उद्योग के साथ मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर पडने की आशंका है।


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