देश के करोड़ों सनातन धर्मीयो की आस्था से समझौता नहीं सत्यनारायण की कथा फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला आदि पर हो कार्यवाही
झांसी - कर्म योगी संस्था एवं अंदर सैयर गेट व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंडित संतोष कुमार गौड़ ने आज के परिवेश में बन गई कुछ फिल्मों के प्रति अपनी उदासीनता व्यक्ति की और कहा की देखा जाए तो सिनेमा बीसवीं सदी में मानव जाति को मिले कुछ बेशकीमती वैज्ञानिक उपहारों में से एक है । इसने विश्व के मनोरंजन के परिदृश्य में एक क्रांति ला दी है क्योंकि इससे पहले नाटक, नौटंकी व त्योहारों के अवसर पर लगने वाले मेले ही लोगों के मनोरंजन का प्रमुख साधन थे । ऐसे समागम कभी-कभी ही आयोजित हुआ करते थे, अत: मनोरंजन के मामले में लोग सदा ही अतृप्त रहा करते थे । सिनेमा विश्व के लोगों के लिये मनोरंजन का एक उतम साधन बनकर सामने आया है इसे किसी भी वर्ग जाति या धर्म के लोग एक साथ देख सकते हैं तथा इसका आनन्द परिवार के सभी सदस्य साथ बैठ कर उठा सकते है । आज के समय में फिल्म मनोरंजन का एक सुलभ साधन बन गया है । भारत में अंग्रेजों के शासन काल से ही फिल्में बनने का सिलसिला जारी हो गया था जिसका सफर मूक, संवाद के साथ श्वेत-श्याम और फिर रंगीन फिल्मों के दौर से गुजरा और आज भी भारतीय फिल्में पूरी दुनिया में बडे चाव से देखी जाती हैं । लेकिन पुरानी फिल्मों और आज के दौर की फिल्मों में एक बडा अंतर है कि जहाँ पुरानी फिल्में समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी वहीं आज का सिनेमा पारिवारिक, नैतिक एवं देश के करोड़ों भारतीयों की धार्मिक आस्था के हितो की कई तरह से अनदेखी सी कर रहा है । जहाँ तक सिनेमा और समाज के आपसी सम्बध की बात है तो अब तक के अनुभवों से यह सिद्ध हो गया है कि दोनों अपनी-अपनी सीमा तक एक दूसरे को प्रभावित करते हैँ । हर दशक का सिनेमा तेजी से परिवर्तित होते समाज को दर्शाता है । सिनेमा और समाज एक दूसरे के पूरक भी हैं । व्यक्ति थोडी देर के लिये ही सही, अपने दुखपूर्ण संसार से बाहर आ जाता है । सिनेमा से आज की युवा पीढ़ी कि सोच विचार एवं मानसिकता पर गहन प्रभाव पड़ता है यदि विभिन् समय पर प्रकाश डाला जाए और यह कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी जिस प्रकार साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है उसी प्रकार सिनेमा भी समाज का दर्पण बनता दिखाई दे रहा है चाहे वह सकारात्मक हो अथवा नकारात्मक । वही दूसरी ओर आज के वर्तमान दौर में यदि सिनेमा जगत की ओर ध्यान केंद्रित किया जाए तो कुछ फिल्म रिलीज होने से पहले विवादों में आ जाती है जो निर्माता-निर्देशक की सोच पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देती है और उसके साथ साथ समाज की सोच और आस्था पर भी विपरीत प्रभाव डालती हैं जिससे प्रदेश में ही नहीं अपितु संपूर्ण भारत में विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न होने लगती है और देश में अस्थिरता का माहौल उत्पन्न होता है ऐसी ही 2022 में रिलीज होने वाली साजिद नाडियाडवाला कृत वेब सीरीज फिल्म सत्यनारायण की कथा करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को आहत करने वाली फिल्मे है इस फिल्म का निर्माण वर्तमान समय में ही तत्काल संपूर्ण तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए और निर्माता-निर्देशक आदि सभी पर शीघ्र कार्रवाई हो और इस फिल्म को बैन किया जाए यदि आदि संबंधित विषय से संबंधित समस्याओं के निराकरण हेतु आज कर्म योगी संस्था झांसी के अध्यक्ष एवं संस्थापक पंडित संतोष कुमार गौड़, एवं संस्था की महिला अध्यक्ष श्रीमती गीता शर्मा आदि ने मा. सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली, मा. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली, मा. हाईकोर्ट प्रयागराज, मा. प्रधानमंत्री भारत सरकार, मा. मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार आदि के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी झांसी को प्रेषित किया । जिसमें करोड़ों देशवासियों की धार्मिक आस्था और धर्म को संज्ञान में रखते हुए 2022 में रिलीज होने वाली फिल्म सत्यनारायण की कथा पर संपूर्ण तरह से शीघ्र प्रतिबंध लगाने एवं निर्माता-निर्देशक आदि सभी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सूर्य प्रकाश मिश्रा ने की ज्ञापन में मुख्य तौर से रजनी वर्मा, सूर्य प्रकाश मिश्रा, मधु पासी,भावना वर्मा, भारती गहलोत,सरिता शुक्ला, आराधना शर्मा, बंदना पांडे, प्रतिभा निगम, इंदिरा चतुर्वेदी, तारा केशवानी, प्रतिमा कुलकर्णी, शांति रायकवार दिव्यता अग्रवाल, नीलम शर्मा, मनोज अग्रवाल, शिवाली अग्रवाल, अंजलि त्रिपाठी, नीलम, शर्मा, विमलेश शर्मा, राधा शर्मा, रीना सरकार मंजुल पुरोहित, श्वेता कौशिक, सरिता पचौरी, बंदना पांडे, कंचन थारवानी, दीप्ति राठौर, रेखा वैध, रेखा उपाध्याय, विमलेश शर्मा, कोमल बक्तानी आदि उपस्थित रहे
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