काेलारस - दुःखद अनंत यात्रा पर निकले आम आदमी के लिए खास अखबार निकालने वाले ए.एच. कुरैशी नही रहे जी हां वही ए एच कुरेशी, आचरण अखबार वाले ऐसा अखबार मालिक जिसका नाम ही काफी है उन्हें सब जानते थे और वे सबको तत्कालीन मुख्यमंत्री पीसी सेठी हो या अर्जुन सिंह या फिर माधव राव सिंधिया तीनो के ही वे नजदीक थे।
कुरेशी सामान्य परिवार में पैदा हुए और औसत शिक्षित थे लेकिन अपने हौंसलों की उड़ान लेकर बाल्यकाल में ही पत्रकारिता में कूदे । वे संघर्षों और समस्याओं से यारी करने का शौक पालते थे । और इन्ही यारों के बलबूते वे आम आदमी के अखबार के मालिक बन गए । नब्बे के दशक में उन्होंने आचरण को श्रेष्ठ अखबार बना दिया लगातार दो बार आचरण को उसकी श्रेष्ठ सज्जा के लिए राज्य शासन का सम्मान मिला।
उस दौर में कुरेशी जी ने अंचल के हर अच्छे पत्रकार को अपने दफ्तर की दहलीज तक लाने के हर प्रयास किये । वे उसे लेने अपने स्कूटर से उसके घर पहुंच जाते थे और उसे घर से स्कूटर पर बिठा लाते थे । न कोई अहम न कोई बहम । दो बार मुझे भी पकड़कर ले गए । एक बार जब आज अखबार निकलने वाला था तब मैं भिण्ड में कार्यरत था । मैं किसी कीमत पर भिण्ड छोड़ना नही चाहता था लेकिन वे कार लेकर मेरे घर पहुंच गए । में 26 वर्ष का और वे अधेड़ । वह भी मालिक । बोले- चलना जरूरी है । कम्पटीशन होगा । जब स्थितियां सामान्य हो जाएं तो हम तुम्हे भिण्ड भेज देंगे ।
दूसरी बार पिछले दशक में । वे अपने पुत्र असद जी के साथ मेरे घर आये और कहा - सिर्फ एक साल के लिए जॉइन कर लो । मजेदार बात उन्होंने साथ मे लाये एक लाख रुपये की रकम भी दी । बोले - यह तुम्हारी एडवांस तनख्वाह है ।
1990 मैं भिण्ड में था । 26 जनवरी को मुझे संभाग के वेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड मिला । मैं सम्मान लेकर मिलने के लिए दफ्तर गया । उन्होंने मुझे कार में बिठाला और लेकर सीधे मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर पहुंच गए और वहां से मुझे लूना खरीदकर दे दी और फिर पैट्रोल पम्प तक साथ आये और उसमें फुल टैंक पेट्रोल भराकर बोले अब इसी से भिण्ड जाओ।
उनके इसी गुण का परिणाम था कि डॉ राम विद्रोही,काशीनाथ चतुर्वेदी,बच्चन बिहारी,राकेश अचल,शकील अख्तर,रवींद्र श्रीवास्तव, से लेकर अस्सी और नब्बे के नब्बे फीसदी सितारा पत्रकार इसी आचरण में काम करते थे जिनमें आज कई बुलंदियों पर हैं।
कुरेशी जी अत्यंत सहज,सरल और सुलभ व्यक्तित्व के धनी थे । यह उनकी ताकत भी थी और कमजोरी भी । बीती साल जब मैँ कोरोना से ग्रसित था तो उनका फोन आया और मेरे शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की । पिछले वर्ष जब आचरण ने पचास वर्ष पूरे किए तो उन्होंने मुझे फोन करके बताया कि अगले साल यानी 14 अक्टूबर2021 को 51 वर्ष होने पर समारोह करेंगे। उनकी यह साध अधूरी रह गई और आज अचानक उनके असमय दुःखद निधन की खबर आ गई।
उनके भतीजे राशिद कुरेशी ने बताया कि रात को वे ऑफिस आये थे और सब कुछ सामान्य था । आज तड़के उन्हें कुछ असहज महसूस हुआ तो परिजनों को बताया । वे तत्काल उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन दुर्भाग्य तब तक उनकी सांसें थम चुकीं थी । आम आदमी का खास अखबार निकालने वाला व्यक्तित्व अनंत यात्रा पर निकल चुका था ।वे 72 वर्ष के थे। उन्होंने अभावों के साथ शिखर छूने का जो इतिहास रचा वह भारतीय पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास में अमित दस्तावेज रहेगा ।
एएच_कुरेशी
विनम्र श्रद्धांजलि
