कोलारस - कोलारस परगना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बदरवास लुकवासा खतौरा रन्नौद सहित खराई मैं खुलेआम बिक रहा 1250रु का डीएपी खाद का कट्टा 1700 रुपए में इसी के साथ यूरिया खाद के कट्टे की कीमत ₹275 की जगह मार्केट में खुलेआम बेचा जा रहा ₹500 में अधिकारियों की नाक के नीचे किसानों को खुलेआम लूटा जा रहा है डीएपी खाद के बाद यूरिया की भी किल्लत से किसान परेशान हैं। खाद लेने की उम्मीद को लेकर गांव से शहर के गोदामों पर आने वाले किसान घंटों लाईन में खड़े होने के बाद भी खाद न मिलने के कारण आए दिन झगड़े व परेशान होते दिखाई दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर कोलारस, बदरवास, लुकवासा, रन्नौद, खतौरा सहित खराई क्षेत्र के किसान खाद की किल्लत से परेशान हैं वहीं प्रशासन पर्याप्त खाद उपलब्ध होने की बात कहकर दावा कर रहा है और वहीं दूसरी ओर देश का किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहा हैं उधर खुले मार्केट में यूरिया खाद की बोरी 272 की जगह 500-600 रूपए में खुलेआम विक्रय की जा रही हैं कार्यवाही के नाम पर प्रशासन प्राईवेट दुकानों पर छापामार कार्यवाही के नाम तक ही सीमित रह गया हैं।
अधिकारियों की मिली भगत से जमाखोरी बनी सबसे बड़ी वजह
मिली जानकारी के अनुसार बताया गया हैं कि यूरिया संकट की वजह केवल आयात में कमी नहीं है. इसके अलावा सबसे बड़ी वजह यूरिया और डीएपी की कमी की एक मुख्य वजह जमाखोरी भी है जो अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ प्राइवेट माफिया दुकानदारों ने खाद को स्टॉक कर उसे ब्लैक में खुलेआम बेच रहे हैं।
एक खाते पर मात्र 10 बोरी ही उपलब्ध हो रहा हैं खाद
खाद की किल्लत पर किसानों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक खाद उन्हें नहीं मिल पा रहा है. किसानों का कहना है कि एक खाते पर मात्र 10 बोरी ही खाद उपलब्ध कराया जा रहा हैं जबकि उनकी आवश्यकता इससे कई गुना हैं। किसानों की समस्या हैं कि जिन किसानों की फसल 10 बीघा से लेकर 150 बीघा तक हैं उन किसानों को खाद भी उसी हिसाब से मिलना चाहिए। लेकिन इस व्यवहारिक समस्या को समझने को तैयार नहीं हैं और वह खाद ब्लैक मार्केट से खरीदने के लिए विवश हो रहे हैं।
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