पंडित संतोष कुमार गौड़ झांसी - कर्म योगी संस्था एवं अंदर सैयर गेट व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंडित संतोष कुमार गौड़ उनके सहयोगी साथियों ने जिलाधिकारी झांसी को पत्र के माध्यम से अवगत करते हुए कहा की झांसी रेलवे स्टेशन के समीप पूर्व समय में चित्रा टॉकीज का संचालन होने के कारण चौराहे का नाम चित्रा चौराहा के नाम से था, अब वर्तमान समय में चित्रा टॉकीज के स्थान पर शॉपिंग कांपलेक्स निर्माणाधीन है और टॉकीज का अस्तित्व लगभग समाप्त सा हो गया है, अब यहां स्टेशन से बाहर अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों और झांसी वासियों के मन में यह दुविधा का विषय है कि जब यहां पर चित्रा टॉकीज है ही नहीं, तो इस चौराहे का नाम चित्रा चौराहे क्यों ?
उपरोक्त सभी प्रश्नों का एवं झांसी वासियों के भावनात्मक विचारों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से चर्चा के दौरान यह भी बात कही गई कि रेलवे स्टेशन करीब होने के कारण विभिन्न राज्यों के यात्री गणों का प्रतिदिन यहां से गुजरना होता है और यह चौराहा ध्यानचंद स्टेडियम करीब है अतः इस चौराहे को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करते हुए इस चौराहे पर हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की भव्य प्रतिमा स्थापित होना चाहिए और इस चौराहे का नाम भी परिवर्तित कर ध्यानचंद चौक के नाम से दद्दा को समर्पित होना चाहिए, भारत सरकार ने उनके सम्मान में साल 2002 में दिल्ली में भी नैशनल स्टेडियम का नाम ध्यान चंद नैशनल स्टेडियम किया था। दद्दा ध्यानचंद हॉकी के जादूगर ही नही अपितु एक सच्चे राष्ट्रभक्त भी थे बर्लिन ओलिंपिक में ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें डिनर पर आमंत्रित किया। इस तानाशाह ने उन्हें जर्मन फौज में बड़े पद पर जॉइन करने का न्योता दिया। हिटलर चाहता था कि ध्यानचंद जर्मनी के लिए हॉकी खेलें। लेकिन ध्यानचंद ने इस ऑफर को सिरे से ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, 'हिंदुस्तान ही मेरा वतन है और मैं जिंदगी भर उसी के लिए हॉकी खेलूंगा।'विगत वर्ष 2021 में भारत सरकार ने आपके नाम से मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार की भी घोषणा की जो झांसी के लिए ही नहीं अपितु संपूर्ण भारतवर्ष के लिए गौरव की बात है भारत में दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है। यह प्रतिवर्ष खेल एवं युवा मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। प्राप्तकर्ताओं को मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति द्वारा चुना जाता है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पिछले चार साल की अवधि में खेल क्षेत्र में शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है। इस पुरस्कार मे एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और नगद राशि पुरस्कृत व्यक्ति को दिये जाते है। सन् 2018 में यह राशी 7.5 लाख रुपये थी। लेकिन अब यह राशि बढ़ाकर 25 लाख कर दिया गया है। सम्मानित व्यक्तियों को रेलवे की मुफ्त पास सुविधा भी प्रदान की जाती है जिसके तहत मेजर ध्यान चंद खेल रत्न पुरस्कार विजेता राजधानी या शताब्दी गाड़ियों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित कोचों में मुफ्त में यात्रा आदि कर सकते हैं।
दद्दा ध्यानचंद हॉकी सम्राट्’ उनकी इस अद्भुत खेल प्रतिभा ने भारत को एक अलग ही मुकाम पर पहुँचा दिया था। वे तीनों बार उस भारतीय ओलंपिक टीम के सदस्य थे; जो अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाई। विदेशी जब उन्हें खेलते देखते तो वाहवाह कर उठते। वे लगभग 25 वर्षों तक विश्व हॉकी के शिखर पर छाए रहे।
मेजर ध्यानचंद की प्रेरक जीवनगाथा; जो हर खेलप्रेमी और खिलाड़ी को समान रूप से प्रेरित करेगी और उनमें खेलों के प्रति जुनून पैदा और ‘हॉकी के जादूगर’ जैसे विशेष्णों से विभूष्त मेजर ध्यानचंद का नाम किसी के लिए भी अपरिचित नहीं है। बचपन में उनमें एक खिलाड़ी के कोई लक्षण नहीं थे; इसलिए कह सकते हैं कि उनमें के खेल की प्रतिभा जन्म जात नहीं थी। उन्होंने अपनी सतत साधना; लगन; अभ्यास; संकल्प व संघर्ष के माध्यम से इस खेल में दक्षता अर्जित की और विश्व के सर्वोत्तम हॉकी खिलाडि़यों की सूची में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा लिया।
आपके नाम से ध्यानचंद चौक एवं प्रतिमा की स्थापना हम सभी भारत वासियों के द्वारा हॉकी के जादूगर के प्रति कृतज्ञता होगी एवम खेल जगत के खिलाड़ियों में एक नया जोश और ऊर्जा का संचार पैदा करेगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सूर्य प्रकाश मिश्रा, श्रीमती दिव्यलता अग्रवाल, कामना श्रीवास्तव आदि ने जिलाधिकारी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया