मंत्री जी ने सुनी सहारा इंडिया के खाता धारकों की फरियाद

झांसी - अंदर सैयर गेट व्यापार मंडल एवं कर्म योगी संस्था के अध्यक्ष पंडित संतोष कुमार गौड़ ने संपूर्ण भारत में सहारा इंडिया जागरूकता कैंपेन ''सहारा इंडिया की आवाज..''  के साथ भारत एवं झांसी के सहारा इंडिया ब्रांच में पिछले कई वर्षों से ग्राहकों के भुगतान की मैच्योरिटी डेट हो जाने के बाद भी ग्राहकों को भुगतान नहीं मिल पाने के कारण और उनके सब्र के बांध को टूटता देखकर झांसी मंडल के के अनेकों सहारा इंडिया पीड़ित एवं अनेकों व्यापारी वर्गों के साथ भारतीय जनता पार्टी के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना एवं उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के मंत्री अध्यक्ष रविकांत गर्ग को ज्ञापन प्रेषित किया जिसमें भारत के सभी राज्यों एवं जिलों में सहारा इंडिया के खाताधारकों की आर्थिक एवं दयनीय स्थिति को संज्ञान लेते  हुए सभी भुगतान शीघ्र किए जाने हेतु सहारा इंडिया को आदेश जारी की जाने की बात कही गई और ज्ञापन के माध्यम से मा. सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया की कोविड-19 के कार्यकाल में जिन खाताधारकों के माता अथवा पिता या दोनों की मृत्यु हो गई है तथा ऐसे खाताधारक जो अब इस दुनिया मैं नहीं है उनके आश्रितों को भी अभिलंब सहारा इंडिया को आदेश जारी कर शीघ्र भुगतान किए जाने का भी आग्रह किया  

गौरतलब है कि मैच्योरिटी डेट बीत जाने के बाद भी वर्षों से ग्राहक सहारा इंडिया कार्यालय में भुगतान के लिए हजारों की मात्रा में खाताधारक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है. अनेकों लोगों ने रोते-बिलखते अपनी पीड़ा को सुनाया और कहां  कि अपना पेट काट-काट कर दुख की घड़ी के लिए हमने पैसा जमा किया था, लेकिन अब सहारा ने हमें बेसहारा लाचार कर दिया और कहीं का नहीं छोड़ा हमारी सब जमा पूंजी सहारा इंडिया में जमा है सरकार हमारी शीघ्र सुनवाई कर ले और हमारा पैसा हमें दिलवा दे लोगों ने बताया की पैसे की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई लिखाई और परिवार के सदस्यों का इलाज आदि भी नहीं हो पा रहा  जिस पर पंडित संतोष कुमार गौड़ ने उपस्थित खाताधारकों को विश्वास दिलाया कि वह किसी भी परिस्थिति अथवा संकट में अपने आप को अकेला महसूस ना करें हर विपदा की स्थिति में हर समय उनका यह भाई उनके साथ है यदि सहारा इंडिया के विषय पर चर्चा की जाए तो सुब्रत रॉय सहारा एक ऐसा नाम जिसने वाकई `सहारा` शब्द की सार्थकता को साबित किया, किस कीमत पर यह अलग बहस का विषय है लेकिन आज सुब्रत रॉय पुलिस कस्टडी में हैं और सहारा `बेसराहा` हो गया है। जी हां! डेढ़ लाख करोड़ का सहारा `बेसहारा` हो गया है। निवेशकों को लगभग 20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान न करने के आरोप में सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने हाल में गैर जमानती वारंट जारी किया था और उसके बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया। उन्हें लखनऊ के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया और फिर पुलिस कस्टडी में चार मार्च को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया और फिर आगे क्या होगा, भगवान जानें।

गोरखपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने वाला 30 साल का शख्स 1978 में महज हजार-डेढ़ हजार रुपये से शुरुआत कर 36 सालों में डेढ़ लाख करोड़ का बिजनेस एंपायर खड़ा कर देता हो, 12 लाख लोगों को अपनी विभिन्न कंपनियों में रोजगार दे रखा हो, कुछ तो खास जरूर है इस हस्ती में। लेकिन तमाम खासियतों से इतर कुछ ऐसी खामियां भी सहारा ग्रुप में रही जिसकी वजह से सुब्रत रॉय को ये दिन देखने पड़े हैं। साल 1978 में सुब्रत रॉय ने सहारा ग्रुप बनाया था।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से कारोबार की शुरूआत की थी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी इस कामयाबी की वजह से ही टाइम मैग्जीन समेत कई पत्र-पत्रिकाओं के कवर पेज पर जगह पाने वाले सुब्रत रॉय का सहारा इंडिया करीब 12 लाख लोगों को रोजगार देने वाली निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया से 20 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम निवेशकों को लौटाने के लिए कहा था सहारा समूह के प्रमुख होने के नाते सुब्रत रॉय दलील देते रहे कि वह ज्यादातर पैसे लौटा चुके हैं। सिर्फ 5 हजार करोड़ की देनदारी बनती है जो वह सेबी को सौंप चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2012 में ही सहारा के खिलाफ फैसला लिया था, लेकिन 2 साल से ये कंपनी अदालत और निवेशकों को गुमराह करती रही। 2012 के बाद से कंपनी एक अदालत से दूसरी अदालत के चक्कर काटती रही और सेबी से बचने की कोशिश करती रही।

सेबी से जब सहारा कानूनी लड़ाई लड़ रहा था तो उस वक्त उसने मार्केट रेगुलेटर की नीयत पर सवाल उठाते हुए अखबारों में विज्ञापन की जंग शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट के गैर जमानती वारंट के बाद भी अखबार में पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। विज्ञापन पर गौर करें तो सहारा प्रमुख को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट भी उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है एक आंकलन के मुताबिक सहारा समूह का अनुमानित नेट वर्थ 70,000 करोड़ रुपये का है। इसके पास करीब 120 कंपनियां हैं। इनके 8 करोड़ निवेशक हैं और 12 लाख कर्मचारी हैं। सहारा समूह के पास 37,000 एकड़ जमीन है। सहारा पैराबैंकिंग, रियल इस्टेट, होटल, मीडिया, हेल्थकेयर, डेयरी, रिटेल और खेल कारोबार में है। सहारा ने 4400 करोड़ रुपये में न्यूयॉर्क प्लाजा और ड्रीम न्यूयॉर्क खरीदा था और लंदन का मशहूर होटल ग्रॉसवेनर हाउस भी सहारा का ही है सहारा प्रमुख के बारे में कहा जाता है कि वह बड़े ही राजसी ठाठ बाट से जीते हैं। सत्ता, समाज, बॉलीवुड और खेलों की दुनिया पर समान दखल रखने वाले सहारा प्रमुख का घर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस की तरह बना है। एक निजी शहर में बना उनका एक घर लाखों डॉलर की लागत से तैयार हुआ है जो ब्रिटेन के शाही निवास बकिंघम पैलेस का डुप्लीकेट है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास रोल्स रॉयस, बेनटली और बीएमडब्लू जैसी महंगी कार है। उनके पास निजी विमानों और हेलिकॉप्टरों का भी  है बहरहाल, आज देश में सुब्रत रॉय पर कसते कानूनी फंदे के बीच अहम सवाल यह है कि डेढ़ लाख करोड़ की परिसंपत्ति वाले सहारा इंडिया परिवार का अस्तित्व मिट जाएगा? अगर इस कानूनी फंदे से सहारा इंडिया पर संकट आता है तो फिर उन 12 लाख सहारा कर्मचारियों के भविष्य की फिक्र कौन करेगा? यह बड़ा सवाल है और सुब्रत रॉय या फिर सहारा इंडिया समूह पर कोई कार्रवाई किए जाने से पहले देश की न्यायपालिका को भी इसपर सोचना होगा।


उक्त ज्ञापन की प्रक्रिया में सहारा इंडिया झांसी ब्रांच के एजेंट एवं कर्मचारी आदि सहित अनेकों खाताधारक उपस्थित रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्म योगी संस्था की महिला अध्यक्ष गीता शर्मा एवं उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश मिश्रा ने की ज्ञापन में मुख्य रूप से सहारा इंडिया कार्यालय के कर्मचारी एवं एजेंट, व्यापारी, एवं झांसी मंडल के अनेकों सहारा खाता धारी पीड़ित मुख्य रूप से उपस्थित रहे 

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म