कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रा बूढा डोंगर में शासकीय नियमों को ताक पर रख कर दी नियुक्ति - Badarwas



जिले के बरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रमाण पत्र जांच करने की जहमत नहीं उठाई

देवेन्द्र शर्मा बदरवास - कोलारस अनुविभाग क्षेत्र के बदरवास जनपद के अन्तगत आने वाले ग्राम बूढाडोगर के बालिका छात्रावास में शासकीय नियमों को धता बताते हुए चौकीदार की नियुक्ति कर दी गई। साथ ही जिले में पदस्थ बरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जमा किए गये प्रमाण पत्नी की जांच करने की जहमत कही उगई। उन्होंने भी आंख बन्द कर नियुक्ति को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।

नियुक्त्ति का शासकीय नियम -

शाकीय गाइड लाइन के अनुसार बालिका छात्रावासों में चौकीदार की नियुक्ति के लिये आवेदक की उम्र 40 से 45 वर्ष होना आवश्यक लेकिन कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास बूढ़ाडोगर में स्कूल प्रबन्धन समिति द्वारा 21 बर्ष के युवक को चौकीदार नियुक्त कर दिया गया है, जो शासकी नियम के विरुद्ध है। साथ ही बालिका छात्रावास में किसी अन्होनी घटना कारित होने से इन्कार नही किया जा सकता। 

नियुक्ति के समय आवेदक की उम्र 21 वर्ष आवेदन में 23 वर्ष दर्शाया गया - 

कस्तूरबा गांधी गांधी बालिका छात्रावास बूढा डोंगर में सन्तोष पटेलिया नामक युवक की नियुक्ति वर्ष में 15-7-2006 में की गई  जबकि आवेदक की अंक सूची में - जन्म दिनांक 20-10-1986 दर्शाई गई है। इतना ही नही आवेदक ने चौकीदार द्वारा जमा किए आवेदन में उम्र 23 वर्ष दर्शायी गई है) जन्म तिथि के अनुसार दरखा जाय तो . सन्तोष पटेरिया की नियुक्ति के समय उम्र 21 बर्ष थी, तब ऐसी स्थिति में चौकीदार के पद पर कालिका छात्रावास में एक युवक को नियुक्ति कैसे कर दी गई 1 नियुक्त किए गये चौकीदार की उम्र आज भी 40-45 साल नही हो पाई है। एस.एम.सी. द्वारा नियुक्ती की गई है। ऐसी इस तरह शासकीय नियम को धता बताकर नियुक्ती किये जाने के लिए स्कूल प्रबन्धन समिति भी शंकाओं के घेरे में है।

बरिष्ठ अधिकारियों ने गलत नियुक्ति का - 

कैसे कर दी 1 शासकीय नियमानुसार बालिका छात्रावास में चौकीदार की नियुक्ति एस.एम.सी. स्कूल प्रबन्धन समिति द्वारा की जाती है। स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा अवैध तरीके से की गई नियुक्ति के लिए आवेदक द्वारा जमा किए गये प्रमाण पत्रों की ओर बारीकी से परीक्षण किया जाए तो दूध का दूध और पानी सामने आ जाएगा क्योंकि आवेदक द्वारा जो जन्म प्रमाण पत्र दस्तावेजों में दिया गया है उसमें आवेदन की उम्र 18 वर्ष ही थी और आज भी आवेदन जन्म दिनांक से 45 वर्ष का नहीं हुआ है तो फिर उसे चौकीदार के पद पर छात्रावास में कैसे रख रखा है यह कहीं न कहीं अधिकारियों की मिली भगत का परिणाम तो नहीं?

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