मनुष्य ने अपने जीवन मे अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं - चिंतन



भगवद चिंतन - मन मे लौ, ठाकुर तेरी लगी, प्रत्येक मनुष्य ने अपने जीवन मे अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं जिसके कारण परमात्मा का चांद बाहर ही खड़ा रह जाता है! आज मनुष्य ने स्वयं को मैं-मैं के अनेक प्रकार के बंधनों और अहंकार की बेड़ियों में बांध रखा है ।

यह सब अज्ञान, अंधकार और अहंकार ही हमे परमात्मा के समीप नहीं जाने देता। इसलिए परमात्मा को पाना है तो इस अंधकार से बाहर आना पड़ेगा  ।हमे निरन्तर परमात्मा का चिंतन,मनन,सिमरन करना पड़ेगा।जिस प्रकार हम जीवन मे कुछ पाने के लिए अथक परिश्रम करते है, उसी प्रकार उस सर्वेश्वर को पाने के लिए हमे लगातार चिंतन करते रहने होगा,तभी परमात्मा रूपी प्रकाश हमारे भीतर आएगा ।पढ़िये कथा: एक आदमी रात को झोपड़ी में बैठकर एक छोटे से दीये को जलाकर कोई शास्त्र पढ़ रहा था।आधी रात बीत गई जब वह थक गया तो फूंक मार कर उसने दीया बुझा दिया,लेकिन वह यह देख कर हैरान हो गया कि जब तक दीया जल रहा था,पूर्णिमा का चांद बाहर खड़ा रहा पर जैसे ही दीया बुझ गया तो चांद की किरणें उस कमरे में फैल गई ।

आदमी बहुत हैरान हुआ यह देख कर कि एक छोटे से दीए ने इतने बड़े चांद को बाहर रोेक कर रक्खा है।इसलिएअब हमें यही पुरुषार्थ करना है कि हमारे अंदर जितने भी प्रकार के मैं मैं के दीये जल रहे हैं , जो परमात्मा के प्रकाश की किरणों को भीतर आने से रोक रहे हैं उन्हें बुझाएं!!!एक छोटे से दीपक ने चंद्रमा का प्रकाश रोका,उसी प्रकार हमारे छोटे छोटे अवगुण परमात्मा को भीतर नही टिकने देते परमात्मा तो बाहें फैला कर हमारा इंतजार करता है, कि मेरे भक्त शुद्ध मन से मेरे पास आये।अपने जीवन को परमात्मा के प्रकाश से भर दें ताकि जीवन में फैला अज्ञान ,अंधकार समाप्त हो जाए और जीवन खुशियों से भरपूर हो जाये ।जय जय श्री राधेकृष्ण जी।

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