खरीफ सीजन में खाद की निर्बाध आपूर्ति, जिले में 22,900 मैट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध - Shivpuri

शिवपुरी - खरीफ वर्ष 2025-26 में कृषकों को उर्वरकों की नियमित एवं समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले में कुल 22,900 मैट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें 2,952 मै. टन यूरिया, 1,052 मै. टन डीएपी, 4,771 मै. टन एनपीके, 13,579 मै. टन एसएसपी तथा 366 मै. टन एमओपी शामिल हैं।

खरीफ सीजन के आरंभ 1 अप्रैल 2025 से अब तक कुल 50,786 मैट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है। इसमें 18,613 मै. टन यूरिया, 10,753 मै. टन डीएपी, 7,116 मै. टन एनपीके, 13,926 मै. टन एसएसपी तथा 378 मै. टन एमओपी का वितरण कृषकों को किया गया है।

उपसंचालक कृषि ने बताया कि रविवार को चंबल कंपनी की डीएपी रैक शिवपुरी रैक पॉइंट पर लगी, जिससे जिले को 564 मै. टन डीएपी प्राप्त होगा। यह खाद जिले के विभिन्न सहकारी समितियों, विपणन संस्थाओं एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं को उपलब्ध कराया जाएगा डबल लॉक गोदाम मार्कफेड करैरा को 90 मै. टन, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों – करैरा, समौहा, खुदावली, नरौआ, टौडापिछोर, नरवर, सीहोर, वैहगंवा, रन्नौद, अकाझिरी तथा खरैह को कुल 275 मै. टन, विपणन संस्था नलदमयंती विपणन सहकारी संस्था नरवर को 75 मै. टन तथा एम.पी. एग्रो को 30 मै. टन डीएपी खाद आवंटित किया गया है।

इसी प्रकार निजी उर्वरक विक्रेताओं को भी कुल 94 मै. टन डीएपी खाद प्राप्त होगा जिसमें शिवपुरी स्थित जनता एग्रो एजेंसी को 13 मै. टन, अल्का एजेंसी बामौरकलां खनियाधाना को 15 मै. टन, विवेक ट्रेडर्स खनियाधाना को 8 मै. टन, रामसेवक सीताराम गेडा करैरा को 4 मै. टन, मां कालका ट्रेडर्स मगरौनी को 10 मै. टन, श्रीराम खाद भण्डार पोहरी को 5 मै. टन, गिर्राज ट्रेडिंग कंपनी शिवपुरी को 20 मै. टन, जैन इंटरप्राइजेज शिवपुरी को 16 मै. टन तथा ओसवाल सेल्स कॉरपोरेशन शिवपुरी को 3 मै. टन डीएपी खाद प्राप्त होगा। खाद वितरण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी के निर्देशानुसार संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

किसान भाई खाद प्राप्त करने के लिए जिला मुख्यालय न आकर अपने क्षेत्र की निकटतम सहकारी समिति या निजी विक्रय केंद्र से ही खाद प्राप्त करें जिले में सभी प्रकार की खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, कृषकगण आवश्यकता अनुसार खाद का उठाव कर सकते हैं।

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