कोलारस - केन्द्र सरकार द्वारा यूजीसी को लेकर जारी किये गये नये अध्यादेश को लेकर जहां सवर्ण समाज के लोगो में नाराजगी है वहीं दूसरी ओर एससी-एसटी एक्ट के झूटे मुकदमे में सरकार से दी जाने वाली सहायता राशि से सवर्ण एवं पिछड़ी जाती के लोग कई वर्षो से परेशानी झेलते चले आ रहे है आरक्षण भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है जिसके चलते अपात्रों को शासकीय बड़े - बड़े पदों पर नियुक्ति मिल जाती है जबकि पात्र यानि की 90 प्रतिशत से अधिक लाने वाले अपने आपको ठगा महसूस करते हुये चाय की दुकान खोलने को मजबूर हो जाता है आरक्षण जाति के आधार की जगह आर्थिक आधार पर दिये जाने की आवश्यकता है इन्हीं विन्दुओं को लेकर शुक्रवार को कोलारस विधानसभा मुख्यालय पर करीब 5 सैंकड़ा से भी अधिक लोगो ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा।
कोलारस विधानसभा क्षेत्र में यूजीसी के विषय को लेकर प्रारम्भ हुये विवाद अब एससी-एसटी एक्ट एवं आरक्षण के खत्म होने तक लगातार जारी रहने की संभावना नजर आने लगी है शुक्रवार को भले ही 5 सैंकड़ा के करीब लोगो ने बाइक रेली निकालकर ज्ञापन कोलारस एसडीएम को सौपा है किन्तु 5 सैकड़ा वह लोग है जोकि आने वाले विधानसभा एवं लोक सभा के चुनावों तक कोलारस विधानसभा में करीब 50 हजार बोट प्रभावित करने की छमता रखते है भले ही वर्तमान में ब्राह्राण, क्षत्रिय, अग्रवाल, जैन, रघुवंशी, कायस्त, सिक्ख, मुस्लिम, ईसाई, वौध्य आंदोलन में जुड़ते हुये दिखाई दे रहे हो किन्तु आने वाले समय में आंदोलन में पिछड़ी जाति के लोगो का भी जुड़ाव होना तय है क्योंकि एससी-एसटी एक्ट एवं कम प्रतिशत वाले अभ्यार्थियों को शासकीय नौकरियों में मौका दिये जाने और सवर्ण एवं पिछड़े जाति के गरीब छात्रों के मुंह से निवाला छीनने से अगड़े एवं पिछड़े दोनो वर्गो के लोग सरकार की पॉलसी से वर्तमान में अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है।
