कोलारस के सोनपुरा में हजारों हेेेेक्टेयर भूमि पर वन विभाग माफियाओं से मिलकर करवा रहा है खेती, खतरे में जंगल हजारों हेक्टेयर जंगल कटवा कर वन विभाग करवा रहा खेती, करोडो की शासकीय भूमि पर कब्जा
कोलारस - शिवपुरी जिले के कोलारस परगना क्षेत्र के बदरवास वन परिक्षेत्र के गणेशखेड़ा सब रेंज के सोनपुरा बीट के कक्ष क्रमांक 1208 और 1214 में हजारों हरे भरे वृक्षों की कटाई का सिलसिला काफी समय से निरंतर जारी है बना हुआ है यह जमीन वन अमले की मिली भगत से हजारों बीघा वन भूमि पर बेखौफ होकर अतिक्रमण कारी खेती कर रहे हैं और उस लहलहाती हुई फसलो पर वन विभाग का अमला कोई नजर नहीं डाल रहा है।
आलम यह कि आरएफ क्षेत्र के बड़े बड़े पेड़ों को काटकर समतल मैदान में तब्दील कर दिया गया है स्थानीय दबंग ग्रामीण और बाहरी लोगों ने क्षेत्र में आए भूमाफियाओं ने वन भूमि की जमीन को अतिक्रमण कर खेती के उपयोग में लेना प्रारंभ कर दिया है ऐसा नहीं कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे अतिक्रमण की जानकारी स्थानीय वन अमले से लेकर विभाग प्रमुखो को नहीं किंतु वन क्षेत्र में फैली बृहद खेती का बड़ा हिस्सा कर हर बर्ष सभी अतिक्रमण कारी द्वारा वन अमले को दिया जाता है जिस कारण जंगल के रक्षक अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर गांधारी की भूमिका में नजर आते हैं।
जंगलों का सफ़ाया निरंतर जारी बना हुआ है किसी भी अतिक्रमण कारी पर कोई बड़ी कार्रवाई न होने से वन भूमि पर अतिक्रमण करने का दौर एक प्रथा बन गया है जबकि नियमानूसार वन क्षेत्र में वन विभाग के अफसरो अनुमति के बिना कोई भी आम या खास व्यक्ति अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा सकता साथ ही वन भूमि में फैली बहुमूल्य वन संपदा और वन जीवों के अस्तित्व से खिलवाड़ नहीं कर सकता किंतु बदरवास वन परिक्षेत्र के गणेशखेड़ा सब रेंज में जंगलों में आश्रय पाने वाले वन्यजीव अब कही भी दिखाई नहीं दे रहे हैं।
जंगलों के हरे भरे वृक्ष काटकर जमीन को खेती के लिए समतल किए जाने के कारण विभित्र प्रजातियो के पशु पक्षी पलायन कर गए हैं या आश्रम नष्ट हो जाने से मृत हो गय है गणेशखेड़ा के डिप्टी रेंजर की उदासीन कार्यशैली के कारण पहले तो स्थानीय क्षेत्र के व्यक्ति ही थोड़ी बहुत वन भूमि पर अतिक्रमण करते थे किंतु अन्य प्रदेशों से आकर वन से वन भूमि पर अपना अघोषित कब्जा जमा लिया है।
यह सब वन विभाग के डिप्टी रेंजर व बीट गार्डों की मिली भगत से ही संभव हो सका है वहीं दूसरी ओर बदरवास रेंजर एसडीओ डीएफओ जैसे अफसरो का निरीक्षण कागजों तक ही सिमटकर रह गया वन भूमि पर बड़े स्तर पर अतिक्रमणकारी द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है जिस पर वन अफसरों द्वारा बड़ी करवाई नहीं की गई है।