02 मार्च को होगा होलिका दहन, 03 मार्च को ग्रहण का सूतक, 04 को रंगोत्‍सव, 05 को भाई दौज - Kolaras




कोलारस - दिनांक २७ फरवरी आमलकी एकादशी व्रत सबका आज काशीविश्वनाथ श्रृंगारदिन है तथा रंगभरी एकादशी होगी। 

२८ फरवरी नृसिंहद्वादशी व्रत होगा पुष्य योग प्राप्त होने पर गोविन्दद्वादशी होता है।

02 मार्च को होगा होलिका दहन, 03 मार्च को ग्रहण का सूतक, 04 को रंगोत्‍सव, 05 को भाई दौज के साथ मनाया  जायेगा होलिका उत्‍सव।

 १ मार्च प्रदोष व्रत होगा। 

२ मार्च व्रत की पूर्णिमा तथा अरुणोदयपूर्व भद्रारहित पूर्णिमा तिथि में रा.शे.४।५६ भद्रा बाद होलिकादहन होगा। 

३ मार्च स्नान-दान की पूर्णिमा। आज  दोलोत्सव (दोलयात्रा) भी होगी।

आज भारत में ग्रस्तोदित खण्ड़चन्द्रग्रहण (चन्द्रोदय के समय ग्रहण लगा रहे) दृश्य होगा।

श्री हृषीकेश ज्योतिष प्रकाशन


होलिका दहन

ऋषिकेश  पंचांग  अनुसार - होलिका दहन 2 मार्च 2026 को सुबह  (3मार्च 2026,को 04,56am )से सूर्योदय से पूर्व करना उचित है इस समय भद्रा समाप्त हो जाएगी अतः मेरी समझ से यह मत समुचित है जिन्हे निर्णय सागर  पंचांग अनुसार होलिका दहन करना है वह नीचे पढे - संवत् २०८२ में फाल्गुन शुक्ल १४ के दिन (२ मार्च, २०२६) प्रदोषकाल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ती है। 


दूसरे दिन पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है किन्तु पूर्णिमा की व्याप्ती साढ़े तीन प्रहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धिगामी है, इसलिये शास्त्रवचन के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन (३ मार्च, २०२६) को होना चाहिए था परंतु ३ मार्च के दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण है और ग्रहणकाल तथा प्रदोष से पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त हो रही है। 


ऐसी स्थिति में धर्मसिंधु के अनुसार होलिका दहन पूर्व दिन ही करना इदं चंद्रग्रहणसत्वे वेधमध्ये कार्यम ग्रस्तोदये परदिने प्रदोषे पूर्णिमासत्वे ग्रहणमध्य एव कार्यम्।


अन्यथा पूर्वदिने - (धर्मसिंधु) दूसरे दिन में ग्रस्तोदय ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा न हो तो पूर्व दिन ही होलिका दहन पूजा करें साढ़े तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धिगामी होते हुए भी धर्मसिंधु में दिये हुए ग्रहण विचार के वचनानुसार होलिका दहन २ मार्च, २०२६ को प्रदोषकाल में करना शास्त्र सम्मत होगा। 


इस दिन भद्रा सायं ०५:५६ से मध्य रात्रि के बाद रात्रि शेष २६:२६ (३ तारीख की सुबह ०५:२६) तक रहेगी भद्रा के सम्बन्ध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथकाल (मध्य रात्रि) के बाद तक रहे तो फिर भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन करें। 


इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं रहेगा इससे प्रदोष वेला सूर्यास्त से २ घंटे २४ मिनट) में ही होलिका का दहन करना शास्त्रोक्त है।

पं. नवल किशोर भार्गव 

मो.नं.9981068449

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म