ओम प्रकाश गौतम ब्यूरो बांदा हिंदुस्तान की गूंज
अतर्रा (बांदा) - जिले में धान खरीद व्यवस्था सवालों के घेरे में है मंडी स्थित खरीद केंद्र के निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने किसानों की परेशानी और अफसरों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं जिला संयोजक सहकारिता उदित नारायण द्विवेदी और वी पैक्स अध्यक्ष दीनदयाल द्विवेदी के औचक निरीक्षण में खरीद प्रक्रिया में भारी सुस्ती और अनियमितता उजागर हुई।
बिना कारण 20 जनवरी को बंद कर दी खरीद
आरोप है कि 20 जनवरी को बिना किसी स्पष्ट कारण के धान खरीद अचानक बंद कर दी गई करीब तीन सप्ताह बाद 11 फरवरी को खरीद दोबारा शुरू की गई, लेकिन तब भी पैक्सों की दैनिक सीमा घटाकर मात्र 100 कुंतल कर दी गई स्थानीय स्तर पर कहा गया कि “लखनऊ से आदेश हैं।”
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के बयान से सरकार की छवि धूमिल हो रही है और जनता सीधे शासन को जिम्मेदार मान रही है।
600 कुंतल की सीमा, तौल सिर्फ 150 कुंतल
निरीक्षण के दौरान शाम चार बजे तक सिर्फ 150 कुंतल धान की तौल पाई गई, जबकि प्रतिदिन 600 कुंतल की सीमा तय है जब मार्केटिंग इंस्पेक्टर आशीष गुप्ता से दिनभर की तौल का आंकड़ा पूछा गया तो वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
किसान लाइन में, आढ़तियों को राहत?
किसानों का आरोप है कि उनका धान महीनों से केंद्र पर पड़ा है, बोरे नहीं दिए जा रहे, मशीनें समय-बेसमय बंद की जाती हैं वहीं, आढ़तियों का धान प्राथमिकता से खरीदे जाने की बात भी सामने आई है।
वी पैक्स अध्यक्ष दीनदयाल द्विवेदी ने डिप्टी आरएम रामानंद जायसवाल पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि खरीद व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
28 फरवरी नजदीक, धान अब भी केंद्रों पर
28 फरवरी से खरीद बंद होनी है, जबकि कई केंद्रों पर बड़ी मात्रा में धान अब भी पड़ा है किसानों को आशंका है कि समय सीमा के कारण उनका धान अधर में लटक सकता है।
उठते सवाल
20 जनवरी को खरीद बंद करने का आदेश किस आधार पर हुआ?, 11 फरवरी के बाद सीमा घटाकर 100 कुंतल क्यों की गई?, क्या “ऊपर से आदेश” का हवाला देकर स्थानीय स्तर की लापरवाही छिपाई जा रही है?
अब देखना यह है कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर किसान यूं ही इंतजार करते रहेंगे।
