13 जिलों के कलेक्टर बदले - कौशलेंद्र विक्रम को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया
शिवपुरी जिले के कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी के सफल कार्यकाल के बाद भाेेेेपाल स्थानांतरण हुआ है उनके स्थान पर नये कलेक्टर के रूप में अर्पित वर्मा को राज्य शासन द्वारा शिवपुरी कलेक्टर के रूप में भेजने का आदेश जारी किया गया जिसके पालन में वर्मा सोमवार को शिवपुरी आकर कलेक्टर के रूप में पदभार संभालेंगे अर्पित वर्मा 2015 बेच के आईएएस अधिकारी है जोकि वर्तमान में श्योपुुर कलेक्टर के रूप में पदस्थ थे वर्मा को अवैध उत्खनन पर प्रहार करने तथा रेत माफियाओं से लेकर नदियों को बचाने का वर्मा का विशेष फोकस रहा है साथ ही प्रशासन कसावट लाने से लेकर विकास के मामलों को तत्काल प्रभाव से प्रारम्भ करने के मामले में जाना जाता है शिवपुरी में सोमवार को वर्मा के आने के बाद देखना है आने वाले समय में कितना बदलाव वर्मा दिला पाते है अथवा राजनैतिक खीचतान में अपना कार्यकाल निकालते है इसके लिये हमें वर्मा के पदभार संभालने के बाद कुछ समय उनके कार्य काल को देखने की आवश्यकता है।
मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 26 IAS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं।
इस बदलाव में 13 जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए हैं, साथ ही एक संभाग आयुक्त के पद पर भी नई नियुक्ति की गई है इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और कामकाज में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धार के कलेक्टर रहे प्रियंक मिश्रा को अब राजधानी भोपाल का नया कलेक्टर बनाया गया है वहीं, भोपाल के मौजूदा कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया गया है।
इस तबादला सूची में सागर, धार, रीवा, भोपाल, नर्मदापुरम, सिवनी, शिवपुरी, उमरिया, श्योपुर, मैहर, दमोह, मंडला, झाबुआ और बैतूल जैसे कई प्रमुख जिले शामिल हैं।
राखी सहाय को उमरिया की नई कलेक्टर नियुक्त किया गया है, जबकि शीला दाहिमा को श्योपुर और विदिशा मुखर्जी को मैहर जिले की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी का कलेक्टर बनाया गया है, जबकि प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर के पद पर भेजा गया है। नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को वित्त विभाग में अपर सचिव नियुक्त किया गया है, वहीं सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
लंबे समय से चल रही प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाओं के बीच सरकार के इस बड़े फैसले को प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
