शिवपुरी - शिवपुरी जिले की 455 जुगया बीट इन दिनों भारी विवादों और गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में बनी हुई है ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अंतर्गत चल रहे प्लांटेशन और बाउंड्री निर्माण कार्यों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मजदूरों को रोजगार देने के बजाय पूरा कार्य जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा है, जबकि सीमांकन और भूमि चयन में भी भारी गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीण भागवत बघेल, गोविंद गोपाल एवं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि जहां से वास्तविक वन भूमि शुरू होती है, वहां से बाउंड्री निर्माण नहीं किया जा रहा, बल्कि काफी दूर से निर्माण कर कुछ लोगों की जमीन को अंदर कर लिया गया है और कुछ प्रभावशाली लोगों की जमीन को जानबूझकर छोड़ दिया गया है ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा मामला बिना मिलीभगत के संभव नहीं है और इसमें बड़े स्तर पर खेल किया गया है।
ग्रामीणों ने साफ आरोप लगाए हैं कि कार्य पूरी तरह जेसीबी मशीनों द्वारा कराया जा रहा है शासन जहां गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं चला रहा है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी मशीनों से काम करवाकर मजदूरों का हक छीन रहे हैं।
लोगों का कहना है कि गांव के गरीब मजदूर काम की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन विभाग मशीनों पर पैसा बहा रहा है सवाल यह उठ रहा है कि मजदूरों के नाम पर आने वाली राशि आखिर कहां जा रही है।
मामले में डिप्टी रेंजर कुलदीप सिंह गौर द्वारा मशीनों से कार्य कराए जाने की बात स्वीकार किए जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी स्वयं मशीनों से कार्य होने की बात मान रहे हैं, तो फिर यह स्पष्ट है कि नियमों की अनदेखी हुई है लोगों का कहना है कि ऊपर छोटे-छोटे बोल्डर होने का तर्क देकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है जबकि हकीकत यह है कि जमीन चयन से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि सरकारी अधिकारी ही इस प्रकार मनमानी करने लगेंगे तो आम जनता आखिर न्याय की उम्मीद किससे करेगी? लोगों का कहना है कि गरीबों का रोजगार छीना जा रहा है, सरकारी भूमि के नाम पर खेल किया जा रहा है और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए मौके का सीमांकन दोबारा कराया जाए और जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो उनके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए लोगों का कहना है कि अब केवल जांच के आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ताबड़तोड़ कार्रवाई दिखाई देना चाहिए।
455 जुगया बीट का मामला अब केवल एक विभागीय विवाद नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के अधिकार, सरकारी जमीन की पारदर्शिता और प्रशासनिक ईमानदारी की बड़ी परीक्षा बन चुका है अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
