शिवपुरी - शिवपुरी के समीप स्थित ग्राम चंदनपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर एवं सुदामा चरित्र के पावन अवसर पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पंडित श्री बृजभूषण जी महाराज ने बताया कि सुदामा जी ने बहुत दुख सहे परंतु उन्होंने कभी भी अपने धर्म का त्याग नहीं किया एवं भगवान श्री कृष्ण की भक्ति भी उन्होंने छोड़ी नहीं इसलिए मनुष्य को चाहिए कि चाहे कितना भी दुख आ जाए संकट आ जाए विपत्ति आ जाए परंतु कभी भी अपने धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए एवं अपने धर्म पर चल करके भगवान का भजन करना चाहिए महाराज ने बताया आजकल के लोग थोड़ा सा दुख आने पर थोड़े से संकट में ही अपने अपने धर्म का त्याग कर देते हैं एवं भगवान पर से अपना विश्वास हटा देते हैं ऐसे मनुष्य भगवान के भक्त नहीं कहे जा सकते बल्कि स्वार्थी उनका कहना चाहिए।
आचार्य जी ने कथा के प्रसंग में सुंदर भगवान के अन्य विवाहों का प्रसंग सुनाया एवं चौबीस गुरुओं की पावन कथा का वर्णन सुनाया और जिस प्रकार यदुवंश का संहार भगवान ने किया वह संपूर्ण कथा श्रवण कराई और बताया की भागवत कथा मोक्ष प्रदान करने वाली है एवं अपने जीवन में श्रीमद् भागवत कथा का अधिक से अधिक श्रवण करना ही मनुष्य के लिए कलयुग में उत्तम मार्ग बतलाया गया है इसलिए भागवत कथा कल्पवृक्ष है जिस प्रकार कल्पवृक्ष के नीचे आकर के मनुष्य सुखी हो जाता है उसी प्रकार मनुष्य भागवत जी के शरण में आकर के सदा सदा के लिए अनंतसुख को प्राप्त कर लेता है इस कथा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जा रहा है एवं 1 जून को पूर्ण आहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जावेगा।
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