शिवपुरी - शिवपुरी के सभी स्थित ग्राम चंदनपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण - रुक्मणी विवाह महोत्सव पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता आचार्य श्री बृजभूषण महाराज जी ने बताया की काम और क्रोध मानव के सबसे बड़े शत्रु माने गए हैं क्योंकि मनुष्य जब काम के वशीभूत होता है तो वह अपनी मर्यादाओं को भूल जाता है एवं काम के वसीभूत होकर के ऐसे कार्यों को कर बैठता है जिससे कि संसार में बदनामी होती है उसका अपमान होता है एवं संसार का प्रत्येक व्यक्ति उसको हीन भावना से देखने लग जाता है मनुष्य को कामना और उसकी वासना से हमेशा बचकर रहना चाहिए अपने आप की रक्षा करना चाहिए आचार्य जी ने बताया इसी प्रकार क्रोध है क्रोध बिन बुलाया मेहमान है क्रोध कभी स्थाई नहीं रहता क्रोध थोड़ी देर के लिए आता है और अपने आप शांत हो जाता है।
इसलिए क्रोध पर अपना कंट्रोल करना सीखे जो मनुष्य हर समय क्रोध करता रहता है जिसको बात बात पर गुस्सा आता है ऐसा मनुष्य अपना विवेक खो देता है अपनी बुद्धि खो देता है अपनी स्मरण शक्ति भी खो देता है क्रोध करने वाला व्यक्ति कभी भी भगवान की साधना नहीं कर सकता और कभी भी उसको शांति प्राप्त नहीं हो सकती क्रोध का त्याग करके मनुष्य सुख शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है महाराज ने सुंदर महारास लीला का प्रसंग सुनाया, जिस प्रकार भगवान ने कंस वध किया कंस वध लीला का पावन प्रसंग कहा जरासंध पर भगवान ने जिस प्रकार चढ़ाई करी उस प्रसंग का वर्णन भी आचार्य जी ने सुनाया और कथा के प्रसंग में सुंदर श्री रुक्मणी कृष्ण भगवान का विवाह प्रसंग सुनाया गया और उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण साक्षात नारायण है एवं रुक्मणी साक्षात मां लक्ष्मी हैं लक्ष्मी नारायण सदा एक हैं और एक साथ रहते हैं और नर लीला करने के लिए भगवान ने यह अवतार लिया था कथा के बाद में सुंदर प्रसाद वितरण किया गया कथा का समय दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक रखा गया है एवं कथा के मुख्य यजमान प्रहलाद सिंह धाकड़ एवं विजय सिंह धाकड़ एवं समस्त परिवार जन हैं कथा 1 जून तक की जाएगी।
