वन विभाग की मौन स्वीकृति के चलते घसारही बीट क्षेत्र में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई जारी - Shivpuri


शिवपुरी - अमोला दक्षिण घसारही बीट क्षेत्र में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। जंगल क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों और ग्रामीणों के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में लगभग 100 से 150 सागौन के पेड़ काटे गए हैं, जबकि कई स्थानों पर पेड़ों के अवशेष तक गायब कर दिए गए ताकि कटान के सबूत मिटाए जा सकें।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि सलैया स्थित रेंज गोदाम के पीछे सागौन का प्लांटेशन लगा हुआ है और वहीं से बड़े पैमाने पर कटान होने की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेंज गोदाम के पीछे लगे सागौन सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर जंगल की सुरक्षा आखिर किस भरोसे चल रही है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब वन विभाग एक व्यक्ति द्वारा जंगल से एक लकड़ी लाने पर तत्काल कार्रवाई कर देता है, तो फिर यहां सैकड़ों सागौन के पेड़ कटने के बाद भी विभाग मौन क्यों बैठा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बिना स्थानीय वन अमले की जानकारी के इतनी बड़ी मात्रा में सागौन का कटान संभव नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार जंगल में लंबे समय से लकड़ी माफिया सक्रिय हैं और रात के समय कीमती लकड़ी बाहर भेजी जा रही है। अब जब मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना तो कटे हुए पेड़ों के निशान तक मिटाने की कोशिश की गई। कई स्थानों पर जमीन के बेहद करीब कटे हुए ठूंठ दिखाई दे रहे हैं, जिससे साफ प्रतीत होता है कि कार्रवाई से बचने के लिए सबूत खत्म करने का प्रयास किया गया।

ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा कि वन विभाग छोटे ग्रामीणों और गरीबों पर तो सख्ती दिखाता है, लेकिन जब संगठित तरीके से जंगल उजाड़े जा रहे हैं तब जिम्मेदार अधिकारी आंखें बंद कर लेते हैं। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये की वन संपदा की चोरी का खुलासा हो सकता है।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और संबंधित बीट गार्ड से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो। लोगों ने कहा कि यदि रेंज गोदाम के पीछे लगे सागौन के पेड़ तक सुरक्षित नहीं रह पाए, तो ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होना चाहिए। ग्रामीणों ने यहां तक मांग उठाई कि जो अधिकारी अपने ही क्षेत्र की वन संपदा की रक्षा नहीं कर पा रहे, उन्हें पद से हटाया जाए।

मामले को लेकर जब वन विभाग की वरिष्ठ अधिकारी से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि “मामला संज्ञान में आया है। टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। यदि अवैध कटान पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

अब यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जंगल माफियाओं के हौसले और बढ़ेंगे तथा आने वाले समय में पूरा जंगल साफ हो जाएगा। प्रशासन और वन विभाग की निष्पक्षता पर जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

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