लोकतंत्र के चेहरे पर 'सियासी' चोट या नियमों की अनदेखी?
शिवपुरी - मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नामांकन निरस्त होने के मामले ने राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है कांग्रेस की दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा बुधवार को शिवपुरी जिला मुख्यालय समेत तमाम ब्लॉकों में कांग्रेसियों ने एक दिवसीय उपवास और धरना देकर इस फैसले के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विवाद की जड़: 'कोर्ट केस' छुपाने का लगा आरोप
सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतना बड़ा फैसला क्यों और कैसे हुआ? दरअसल, मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को निरस्त करने का आदेश जारी किया था।
भाजपा की ओर से इस पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसमें दावा किया गया कि नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित चल रहे एक मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में छुपाई है। इस आपत्ति की गहन जांच के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए नामांकन को खारिज कर दिया राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन केवल एक नोटिस के आधार पर खारिज करना लोकतांत्रिक परंपराओं के कतई अनुरूप नहीं है।
मोहित अग्रवाल, जिला अध्यक्ष (कांग्रेस Committee, शिवपुरी 'सत्ता का दबाव और दमनकारी नीति' विपक्ष का सीधा प्रहार?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर के गुना बायपास स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में नेता और कार्यकर्ता मौन और धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेतृत्व ने सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई भाजपा सरकार के इशारे और सत्ता के दबाव में की गई है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस प्रकार के फैसलों से देश की निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं, जिसका जवाब आने वाले समय में जनता खुद देगी।
हर ब्लॉक में गूंजा विरोध, एकजुट हुए कार्यकर्ता
यह प्रदर्शन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर शिवपुरी के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिला:- कोलारस नगर मानीपुरा स्थित आंबेडकर पार्क में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बलभद्र सिंह धाकड़ के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पुरजोर विरोध प्रदर्शन किया कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह साफ कर दिया है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।
संपादकीय टिप्पणी नामांकन रद्द होने के इस मामले ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के बीच आपसी टकराव को चौराहे पर ला खड़ा किया है अब देखना यह है कि कांग्रेस इस कानूनी लड़ाई को आगे कहाँ तक ले जाती है।
