ज़मीन की जंग, वन विभाग की कार्यवाही के आगे ढाल बना युवक, बोलेरो के नीचे लेटकर भगाया ट्रैक्टर
रिपोर्ट - सर्वेश राजपूत शिवपुरी - मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और फिल्मी अंदाज़ का मामला सामने आया है। यहाँ के कोलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उकावल गाँव में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुँची वन विभाग की टीम के सामने एक ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खड़ा हो गया। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। बात इतनी बढ़ गई कि विभाग के वाहन (बोलेरो) के आगे एक युवक लेट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि उकावल गाँव में कुछ लोग ट्रैक्टर के जरिए वन विभाग की ज़मीन पर अवैध रूप से जुताई का काम कर रहे हैं। सूचना के आधार पर मुस्तैद हुई वन कर्मियों की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुँची और जुताई कर रहे ट्रैक्टर को ज़ब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
जैसे ही वनकर्मियों ने ट्रैक्टर को अपने कब्ज़े में लेने का प्रयास किया, वहाँ मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा इसी बीच मौके पर मौजूद मुकेश आदिवासी नाम के एक युवक ने वन विभाग की कार्रवाई को रोकने के लिए एक खतरनाक कदम उठाया। वह सीधे जाकर वन विभाग के सरकारी बोलेरो वाहन के पहियों के नीचे लेट गया "जब तक ट्रैक्टर सुरक्षित दूर नहीं निकल गया, तब तक युवक गाड़ी के नीचे से टस से मस नहीं हुआ।"
जब्ती से बचाने के लिए रची गई रणनीति
मुकेश आदिवासी के गाड़ी के नीचे लेटते ही वन विभाग के हाथ-पांव फूल गए। वनकर्मी लगातार युवक को समझा-बुझाकर गाड़ी के नीचे से बाहर निकालने की कोशिश करते रहे, लेकिन युवक अपनी ज़िद पर अड़ा रहा।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के पीछे एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही थी। जहाँ एक तरफ मुकेश गाड़ी के नीचे लेटकर वन विभाग के अधिकारियों का ध्यान भटका रहा था, वहीं दूसरी तरफ मौका पाकर ट्रैक्टर चालक अपने वाहन को लेकर रफूचक्कर हो गया। जैसे ही ट्रैक्टर सुरक्षित दूरी पर निकल गया, मुकेश चुपचाप गाड़ी के नीचे से बाहर आ गया। इस चालाकी के कारण वन विभाग की टीम ट्रैक्टर को ज़ब्त करने में नाकाम रही और उन्हें खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा।
100 बीघा ज़मीन का विवाद
सूत्रों और विभागीय जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद सनवारा बीट के उकावल गाँव के पास स्थित लगभग 100 बीघा से अधिक वन भूमि से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस ज़मीन पर जूर गाँव के करीब 8 से 10 आदिवासी परिवारों का लंबे समय से कब्ज़ा है।
हाल ही में वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस चिन्हित ज़मीन पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत ज़मीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही थी।
आगे क्या?
ग्रामीणों के तीखे विरोध और इस हंगामे के चलते फिलहाल वन विभाग की यह कार्रवाई अधूरी रह गई है। हालाँकि, वन विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि वे इस पीछे हटने वाले नहीं हैं। विभाग अब और अधिक तैयारी और पुलिस बल के साथ आगामी दिनों में दोबारा बड़ी कार्रवाई करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
