लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम अनिवार्य है — कुंजबिहारी चतुर्वेदी
शिवपुरी - गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, शिवपुरी में आचार्य सम्मान समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान, मध्यप्रदेश, भोपाल के सम्माननीय सदस्य एवं विद्याभारती के शिवपुरी जिला प्रतिनिधि कुंजबिहारी चतुर्वेदी उपस्थित रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यालय के प्रबंधक पवन शर्मा, सह प्रबंधक जितेन्द्र परसाई तथा प्राचार्य लोकेंद्र सिंह मेवाड़ा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। छात्र ओम शर्मा एवं प्रशांत धाकड़ ने मंचस्थ अतिथियों का तिलक लगाकर एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।
इसके पश्चात मुख्य अतिथि श्री कुंजबिहारी जी चतुर्वेदी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि "गुरु हमारे जीवन का वह प्रकाश है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। जीवन में किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण आवश्यक है। गुरु के मार्गदर्शन एवं अहर्निश प्रयास से ही व्यक्ति अपने जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।" उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और निरंतर अध्ययन की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र परसाई ने अपने संबोधन में भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का भी विकास करते हैं उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय के माध्यम से गुरु के महत्व को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को अपने जीवन में गुरु के आदर्शों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर छात्र माधव गौतम सहित अन्य विद्यार्थियों ने भी गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए कार्यक्रम का विशेष आकर्षण कक्षा द्वादशी के विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय के समस्त आचार्यों का सम्मान रहा, जिसने पूरे वातावरण को श्रद्धा और सम्मान से अभिभूत कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन, मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं आभार प्रदर्शन कक्षा द्वादशी के छात्र सिद्धार्थ कौरव द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य, दीदी एवं छात्र उपस्थित रहे गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन श्रद्धा, संस्कार और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के उत्कृष्ट मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायी समारोह सिद्ध हुआ।
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