दतिया ब्राह्मण समाज का तर्क - आशुतोष जीते या घनश्‍याम दोनों की जीत में ब्राह्राण समाज की अहम भूमिका - Shivpuri



विधानसभा के शेष कार्य काल के लिये दतिया के विधायक का निर्णय सोमवार को


शिवपुरी - मध्‍यप्रदेश के दतिया में सोमवार की सुबह मतो की गणना का कार्य प्रारम्‍भ होगा और देर शाम तक दतिया विधानसभा का अगला विधायक यानि की विधानसभा चुनाव होने तक के लिये विधायक का चेहरा दतिया के लोगो के सामने होगा दतिया विधानसभा क्षेत्र के लिये हुये मतदान में मुख्‍य मुकाबला कांग्रेस प्रत्‍याशी घनश्‍याम सिंह एवं भाजपा प्रत्‍याशी आशुतोष तिवारी के बीच दिखाई दिया सोमवार की शाम तक इन दोनो में से एक के भाग्‍य का फैसला हमारे सामने होगा इस संबंध में दतिया विधानसभा क्षेत्र के ब्राह्राण समाज का बयान सामने आया है कि दतिया ब्राह्राण समाज का मत दोनो ही प्रत्‍याशियों के लिये समान रूप से बटा है दतिया का अगला विधायक आशुतोष बने तो ब्राह्राण विधायक और यदि घनश्‍याम सिंह जीते तो असंतुष्‍ट दादा समर्थकों की जीत कुल मिलाकर दतिया ब्राह्राण समाज दोनो की प्रत्‍याशी की जीत में ब्राह्राण समाज की जीत बता रहा है। 


दतिया विधानसभा मतदान का फैसला सोमवार को, भाजपा-कांग्रेस के भीतरघात पर टिकी सबकी नजर


मध्‍यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सोमवार को सामने आएगा मतगणना सुबह 8 बजे से 20 टेबलों पर 15 राउंड में होगी यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।


कम मतदान, शहर में वोटिंग की सुस्ती, महिलाओं की घटती भागीदारी, भाजपा में भीतरघात की चर्चा और कांग्रेस की गुटबाजी ने मुकाबले को पूरी तरह खुला बना दिया है 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.42 प्रतिशत वोट पड़े, जो 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 8.86 प्रतिशत अंक कम है कुल 19,528 वोट कम पड़े इनमें सबसे ज्यादा कमी महिला मतदान में रही महिला मतदाताओं के 9,495 और पुरुषों के 7,754 वोट कम पड़े राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान का फायदा किसे मिलेगा, इसका जवाब अब ईवीएम से ही मिलेगा।


गांवों ने बढ़ाई वोटिंग, शहर में दिखी उदासीनता
बूथवार आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कई मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान हुआ बूथ 62 पर सबसे अधिक 92.19 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ इसके विपरीत दतिया शहर के कई बूथों पर मतदान 55 प्रतिशत से भी नीचे रहा। 

बूथ 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम है यानी ग्रामीण मतदाता मतदान के लिए बड़ी संख्या में निकले, जबकि शहरी मतदाताओं ने अपेक्षाकृत कम रुचि दिखाई।

मुकाबला त्रिकोणीय, लेकिन चर्चा दो नेताओं की
चुनाव मैदान में भाजपा के आशुतोष तिवारी, कांग्रेस के घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान मुकाबला उम्मीदवारों से ज्यादा पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के इर्द-गिर्द घूमता रहा। भाजपा में टिकट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की चर्चा लगातार बनी रही। दूसरी ओर कांग्रेस भी स्थानीय स्तर पर गुटबाजी के आरोपों से पूरी तरह बाहर नहीं निकल सकी।


किसके पक्ष में क्या माहौल
भाजपा के पक्ष में

  • - सरकार और पूरे संगठन ने पूरी ताकत झोंकी।
  • - एक दर्जन से अधिक मंत्री, सांसद और विधायकों ने क्षेत्र में प्रचार किया।
  • - जातीय समीकरणों के हिसाब से अलग-अलग नेताओं की ड्यूटी लगाई गई।
  • - सत्ता में होने का लाभ मिलने की उम्मीद।
  • - कांग्रेस की स्थानीय गुटबाजी का फायदा मिल सकता है।


भाजपा की चिंता

  • - आशुतोष तिवारी नया चेहरा हैं।
  • - नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं की नाराजगी की चर्चा।
  • - शहर में कम मतदान भाजपा के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।


कांग्रेस के पक्ष में

  • - घनश्याम सिंह क्षेत्र में पहले विधायक रह चुके हैं।
  • - ग्रामीण इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
  • - प्रदेश स्तर पर पार्टी ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा।
  • - भाजपा में भीतरघात की चर्चा का लाभ मिलने की उम्मीद।


कांग्रेस की चिंता

  • - स्थानीय स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आई।
  • - पार्टी के अंदर ही आरोप-प्रत्यारोप। 
  • - आजाद समाज पार्टी के मैदान में होने से दलित वोटों में सेंध की आशंका।

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