🚨 UPI डिजिटल पेमेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 0.4% MDR चार्ज पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार!
मुख्य बिंदु:
- शुल्क का दायरा: यह शुल्क केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन (PPI/वॉलेट के माध्यम से ₹2,000 से अधिक के लेन-देन) पर प्रभावी है।
- सामान्य उपभोक्ताओं पर प्रभाव: सामान्य बैंक-टू-बैंक UPI लेनदेन पूर्व की भांति पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे। आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
- अदालत का रुख: शीर्ष अदालत ने इस वित्तीय और तकनीकी नीतिगत निर्णय में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक राशि वाले चुनिंदा यूपीआई (UPI) मर्चेंट ट्रांजैक्शन (Merchant Transactions) पर लगने वाले 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से डिजिटल भुगतान नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
याचिका में की गई थी रोक की मांग
हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर लगने वाले 0.4% एमडीआर (MDR) चार्ज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह के शुल्क डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रसार को प्रभावित कर सकते हैं और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।
कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से किया इनकार
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता को कोई तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह साफ हो गया है कि मौजूदा नियमों और लागू शुल्कों की व्यवस्था पर फिलहाल कोई ब्रेक नहीं लगाया जाएगा।
क्या होता है MDR और किन पर पड़ता है असर?
MDR (Merchant Discount Rate): यह वह शुल्क होता है जो किसी मर्चेंट (व्यापारी) को अपने ग्राहक से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देना पड़ता है।
सामान्य UPI बनाम PPI Wallet/P2M: साधारण बैंक-टू-बैंक यूपीआई भुगतान पर कोई MDR नहीं लगता है, लेकिन ₹2,000 से अधिक के प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे वॉलेट के ज़रिए मर्चेंट को किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर निर्धारित इंटरचेंज/MDR लागू होता है।