Ugc, महंगाई से नाराज़ चल रही जनता पर एक और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर कर लगाना सरकार की बिदाई का बन सकता है कारण - Shivpuri



शिवपुरी - सरकार का दावा 96% transactions पूरी तरह चार्ज फ्री रहेगा सरकार पक्ष के सवालों से बचने के लिए लगातार अपना पक्ष रखते हुए यूपीआई में कर को लेकर भाजपा सरकार के सभी मंत्री एवं भाजपा नेता सोशल मीडिया एवं प्रिंट मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं कि यह कर केवल और केवल मर्चेंट पर ही लगेगा कस्टमर पर कोई कर नहीं लगेगा जबकि मीडिया एवं विपक्ष लगातार कई सवाल पूछ रहा है जैसे की यह डिसाइड कैसे किया जा सकता है कि यूपीआई से पेमेंट करने वाला मर्चेंट है या ग्राहक साथ ही इस कर की भारत सरकार को क्या आवश्यकता आन पड़ी किसी के साथ कई सवाल विपक्ष द्वारा सरकार से पूछे जा रहे हैं चाहे वह सोशल मीडिया के माध्यम से या मीडिया द्वारा लिए जा रहे इंटरव्यू के माध्यम से अपनी अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का कार्य विपक्ष कर रहा है।

वही जानता पूर्व से यूजीसी को लेकर सरकार ने नाराज चल रही थी दूसरी ओर सरकार द्वारा जनता के ऊपर एक और फरमान जारी कर जबरन टैक्स लगाया जा रहा है जिससे आने वाले समय में गरीबी एवं भुखमरी जैसे कई गुना महंगाई बढ़ने के चांस होना विपक्ष द्वारा बताया जा रहा है।

UPI MDR को लेकर पूरी बात आसान भाषा में:

चार्ज लगाकर? Customer से नहीं, Merchant से बसूलने का सरकार का दावा

₹2,000 तक: MDR 0%
• ₹2,000–₹75,000: MDR 0.4%
• ₹75,000 से अधिक: MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित
• ₹2 लाख या ₹5 लाख: MDR फिर भी अधिकतम ₹300


भाजपा सरकार के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी सोशल मीडिया फेसबुक पर पोस्ट कर सरकार की योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी

उन्होंने कहा
• Family/Friends को पैसे भेजना: कोई MDR नहीं
• 96% UPI transactions: ₹2,000 से कम, इसलिए इन पर 0% MDR

UPI आज हर महीने करीब ₹30 लाख करोड़ के transactions process कर रहा है। यह व्यवस्था मजबूत और sustainable बनी रहे, इसी उद्देश्य से MDR का यह regulated structure तय किया गया है।

UPI के नए MDR नियम पर सियासी बहस तेज, 15 अक्टूबर से चुनिंदा बड़े मर्चेंट भुगतान पर लगेगा शुल्क 


सरकार का दावा—ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं, करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजेक्शन रहेंगे प्रभावित नहीं


UPI भुगतान को लेकर केंद्र सरकार ने नए Merchant Discount Rate (MDR) का ढांचा तय किया है, जिसे लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सरकार के अनुसार यह टैक्स नहीं, बल्कि चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। 


सरकार के मुताबिक ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और सभी Person-to-Person (P2P) लेनदेन पर कोई MDR नहीं होगा। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा और ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन तक सीमित रहेगा। 


सरकार का दावा है कि करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजेक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे। साथ ही, ग्राहकों से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी। 

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस व्यवस्था का पक्ष रखते हुए कहा है कि ग्राहकों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा और MDR का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। 

वहीं, विपक्ष और आलोचकों ने इस व्यवस्था पर चिंता जताई है कि मर्चेंट पर लागत बढ़ने से इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों या डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि MDR ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। 


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