नरवाई जलाने से घटती है खेतों की उर्वरता, दीवार लेखन से किसानों को किया जा रहा जागरूक - Shivpuri



शिवपुरी। खेतों में फसल अवशेष यानी नरवाई और पराली जलाने से होने वाले नुकसान को लेकर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर दीवार लेखन के माध्यम से किसानों और आमजन को नरवाई नहीं जलाने का संदेश दिया जा रहा है।

अभियान के तहत किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के साथ मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी जा रही है कृषि विभाग के अनुसार, नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों, मित्र कीटों तथा आवश्यक पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है इससे खेतों की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित हो सकती है।

सहायक कृषि अभियांत्रिकी भगवान सिंह नरवरिया ने बताया कि दीवार लेखन के माध्यम से किसानों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से नरवाई जलाने के बजाय उसके उचित उपयोग और प्रबंधन के विकल्प अपनाने की अपील की।

फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाने पर जोर

कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे नरवाई और पराली को खेतों में जलाने के बजाय फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग करें अथवा अन्य उपयुक्त तरीकों से उनका प्रबंधन करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विभाग के अनुसार, फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ आगामी फसलों के लिए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में भी सहायता मिलती है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण और कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए नरवाई नहीं जलाएं तथा इसके उचित प्रबंधन के तरीकों को अपनाएं।

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