बर्तमान में फुल फे्रश चेहरा नही कुर्सी पर काबिज
कोलारस-तहसील कोलारस में विगत कई वर्षो से कागजीबाडा सिमटने का नाम नही ले रहा है। पूर्व में पदस्थ तहसीलदार नवनीत शर्मा के बाद से राजस्व विभाग की पटरी अभी तक रास्ते पर नही आ सकी है। ज्ञात हो कि पूर्व में सत्ता में काबिज जन सेवको ने भी उक्त अव्यवस्थाओ पर किसी प्रकार का कोई ध्यान नही दिया जिसके चलते तहसील कार्यालय में किसानो को परेशानी का सामना करना पडा है।
इसी दौरान सूखा राहत, फसल ऋण बीमा, ई-गिरदावली, प्रकरणो का आरसीएम में दर्ज किया जाना, नामांतरण एवं बटवारे के राजस्व संबंधी काम चलते रहे है। किन्तु कोई जबाव देह अधिकारी राजस्व विभाग को इस लम्बे समय में न मिल पाने के कारण उक्त जनता और किसान से जुडे हुई काम भी अव्यवस्थित और गैर जिम्मेदाराना तरीके से निर्वाहन किये गये है।
एक समय तो हालत ऐसी रही है कि यहां तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पद दोनो ही खाली रहे जिसके चलते बहुत से जमीन संबंधी प्रकरण अपने परिणाम पर नही पहुंच सके है उनमें से बहुत से अभी भी धूल खा रहे है उक्त समय में व्यवस्था बनाने के लिए आरआई लेविल के कर्मचारियो को एक आदेश जारी कर नायब तहसीलदार बना दिया गया था। जिसके चलते कोलारस जैसी बडी तहसील का प्रभार आरआई परिहार को दे दिया गया। वहीं सूखा राहत की कमान भी प्राईवेट कम्प्यूटर ऑपरेटरो को सौंप दी गई। उक्त समय से राजस्व विभाग का ढर्रा ऐसा अस्थ व्यस्थ हुआ कि पुराने राजस्व संबंधी प्रकरण तो फाईलो में दवे रह गये और लेन देन के कामो को जम कर पंजीयो पर किया गया। तब से लेकर अब तक पूरी तहसील प्राईवेट कर्मचारियो द्वारा संचालित होने से भ्रष्टïाचार के मामले में बदनाम हो गई है।
तहसील के हालात हाल ही मैं भी यही रहे कि प्राईवेट कर्मचारी कोई भी शासकीय फाईल और गोपनीय दस्तावेजो को अपने बैग में रख कर घूमते नजर आते रहे है। किसानो एवं जनता की कोई सुनवाई व्यवस्थित रूप से नही हो रही है। नायब तहसीलदार का पद बर्तमान में भी एक तरह से खाली ही है। क्योकि इस पर ट्रेनि नायब तहसीलदार काविज है जो नियमित न तो कुर्सी पर बैठती है और न ही राजस्व संबंधी प्रकरणो को व्यवस्थित रूप से चलाने में कोई रूचि दिखाती है। पटवारियो का निश्चित स्थान पर मिलना मुश्किल हो गया है। किसानो की जमीन की पटटी जमा करने में भी पटवारियो की मनमर्जी समस्या बनी हुई है। राजस्व विभाग का बरिष्ठ अधिकारियो द्वारा नियामित निरीक्षण न होने से और सत्ता में काबिज बडे राजनेताओ का इस ओर कोई ध्यान न होने से तहसील कार्यालय भ्रष्टïाचार का अडडा बना हुआ है। यहां जो भी अधिकारी आते है लूट खसोट कर चलते बनते है। और यहां के नेता इस लूट को रोकने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे है। वहीं दूसरी ओर एसडीएम कार्यालय की व्यवस्थायें सही हाथो में होने के कारण व्यवस्थित हो गई है। इस कार्यालय में पूर्व में पसरा भ्रष्टïाचार अब साफ होने को है। पूरे समय जनता की समस्याओ की सुनवाई की जा रही है ऐसी ही व्यवस्था तहसील कार्यालय में भी होना अत्यंत आवश्यक है। ताकि काफी समय से पैंडिग पडे प्रकरणो का निराकरण हो सके है।
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