आजादी के अमृत महोत्सव पर कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में आयोजित हुआ कार्यक्रम
बदरवास - देश की आजादी के किये निःस्वार्थ भाव से अपना सर्वस्व अर्पण करने के बाद भी भू भारती को और कुछ देने की अभिलाषा लिए शहीद हो गए अमर क्रांतिकारियों को पग-पग और पल-पल हमें याद रखना होगा तभी उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्दांजलि होगी उक्त वक्तव्य शा.कन्या उमावि बदरवास में आयोजित स्वाधीनता के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता गोविन्द अवस्थी द्वारा दिया गया। कार्यक्रम में बिशिष्ट अतिथि सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य प्रधुम्न शर्मा एवं अध्यक्षता बिद्यालय प्राचार्य चंद्रभान श्रीवास्तव द्वारा की गई।
शाकमावि बदरवास में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर बोलते हुए मुख्य वक्ता गोविन्द अवस्थी ने स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के आयोजन और सार्थकता पर बोलते हुए कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव हमें यह अवसर देता है कि हम अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने इतिहास को और भी करीब से जानें, क्योंकि जब आप आजादी के संघर्ष के बारे में पढ़ेंगे और उस को करीब से जानने का प्रयास करेंगे तो आपको पता लगेगा कि भारतमाता ने कैसे-कैसे वीरों को जन्म दिया है और उन अमर शहीदों में इतना आत्मविश्वास और देश को लेकर इतना प्रेम था कि वह अपने प्राण भी त्याग करने को तैयार थे ।यही कारण है की जो अनगिनत आजादी के परवाने स्वतंत्रता संघर्ष में स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते लड़ते शहीद हो गए, और जाते जाते भी उन सब ने आजादी का नारा लगाया और स्वतंत्र भारत का ख्वाब देखा, और यही कारण भी है कि भारत को अपने संघर्ष का परिणाम मिला और भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त होकर 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया। आजादी की कहानियां आज के बच्चों तक पहुंचाई जा सके और उन्हें बताया जा सके कि आजादी को हासिल करने में भारत को कितना संघर्ष करना पड़ा, कितने बलिदान देने पड़े उसके बाद कहीं जाकर हमें आजादी मिली।
भारत को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए लंबे समय तक अंग्रेजों का गुलाम रहा लेकिन सभी देशवासी के मन में स्वतंत्रता प्राप्त करने की प्रबल इच्छा थी और यही इच्छा ही एक दिन आत्मविश्वास और जुनून में बदल गई।
आजादी प्राप्त करने के लिए भारत में समय-समय पर बहुत सारे आंदोलन चलाए जिनमें कुछ आंदोलन सफल हुए तो कुछ आंदोलन असफल साबित हुए।
स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए बहुत सारे भारतवासी शहीद भी हुए जिनमें कुछ लोग ऐसे थे जिनकी आयु बहुत कम थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने विरोधी को कड़ी चुनौती दी और उनका डटकर सामना अपनी आखिरी सांस तक किया।
इन सब कुर्बानियों और लंबे संघर्ष के बाद भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली और आजाद भारत की नींव रखी।
आजादी का अमृत महोत्सव किसी विशेष धर्म जाति या राज्य के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण भारत के लिए है और संपूर्ण भारत इस महोत्सव को मना रहा है। जब हम अपने स्वाभिमान और बलिदान को याद करते हैं और उसे अगली पीढ़ी को भी बताते हैं, इसलिए आजादी का अमृत महोत्सव का महत्व वर्तमान समय में बहुत अधिक है क्योंकि आज आजादी को 75 साल हो गए हैं लेकिन अभी भी ऐसे बहुत सारे युवा है जो आजादी के संघर्ष को करीब से नहीं जानते हैं और उन्हें बलिदान की कहानियां भी नहीं पता है इसलिए इस महोत्सव के माध्यम से उन सभी लोगों को आजादी के सही मायने बताने बहुत जरूरी है।
कार्यक्रम में ममता श्रीवास्तव, कपिल परिहार, डॉ. शशिकला राठौर,चंपालाल कुशवाह,कल्पना दुबे,चंपालाल ओझा,श्रीकृष्ण सुमन,संतोष ओझा,हितेंद्र कुशवाह,नावेदअली हाशमी,आरती पटवा,नीतू श्रीवास्तव,बलराम परिहार सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।