गुना में खुले केंद्रीय विश्वविद्यालय: सांसद डॉक्टर के पी यादव

नियम 377 के तहत रखी मांग

गुना - लोकसभा के बजट सत्र के द्वितीय चरण में आज मंगलवार को नियम 377 के अधीन सांसद डॉक्टर के पी यादव ने गुना में विश्वविद्यालय खोले जाने की मांग रखी है.सांसद डॉक्टर के पी यादव ने मांग रखते हुए कहा कि मेरे संसदीय क्षेत्र गुना को भारत सरकार द्वारा आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल किया गया है और यहां कोई भी राज्य या केंद्रीय विश्वविद्यालय न होने के कारण शैक्षणिक संस्थाओं का अभाव है जिससे अंचल के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए अन्य शहरों में जाना पड़ता है, वर्तमान में मध्य प्रदेश के सागर और अमरकंटक में केंद्रीय विश्वविद्यालय भारत सरकार द्वारा संचालित किए जा रहे हैं. गुना लोकसभा शिक्षा के दृष्टिकोण में अत्यंत पिछड़ा है और सागर एवं अमरकंटक विश्वविद्यालय क्रमशः 250 किमी एवं उससे भी अधिक की दूरी पर है, जिसके कारण छात्रों को अच्छी और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है. गुना के युवाओं और छात्रों की निरंतर मांग है कि गुना में भारत सरकार द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए,जिससे छात्रों को शिक्षा के अवसर मिले तथा लोकसभा के समग्र विकास को गति मिले.सरकार से निवेदन है कि गुना लोकसभा क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा संचालित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु स्वीकृति दी जाए जिसके परिणाम स्वरूप गुना लोकसभा के युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर भी प्राप्त हों,जिससे लोकसभा क्षेत्र की प्रगति और हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा सब को शिक्षा देने का जो लक्ष्य है उसकी पूर्ति हो. गौरतलब है कि गुना, अशोकनगर,शिवपुरी में कोई भी बड़ा शिक्षण संस्थान न होने के कारण यहां के छात्रों को मजबूरन कोटा,इंदौर,भोपाल इत्यादि शहरों में जाकर अध्ययन करना पड़ता है, जिससे इनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है.यदि स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो जाए तो यहां के छात्रों एवं आने वाली पीढ़ी के सुखद भविष्य की नींव रखी जा सकती है.सांसद डॉक्टर के पी यादव  शिक्षा,स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाओं को लेकर प्रयासरत रहते हैं, जिससे इस पिछड़े हुए क्षेत्र को विकसित एवं खुशहाल बना सकें।

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