कोलारस न्यायालय ने चैक बाउंस के मामले में सेवानिवृत आरक्षक लोधा को 6.50 लाख से अधिक जमा करने तथा 06 माह की सजा सुनाई - Kolaras


कोलारस - कोलारस न्यायालय में श्री रामनिवास भार्गव की ओर से 5 लाख रुपए के चेक बाउंस के मामले में पैरवी अधिवक्ता श्री मनीष दरबारी के द्वारा की गई और उक्त पैरवी में भी दरबारी द्वारा अपने क्लाइंट आवेदक को 5 लाख के चेक बाउंस के मामले में सफलता दिलाते हुए अनावेदक प्रतिवादी रिटायर्ड पुलिस आरक्षक कमरलाल लोधा को माननीय न्यायालय कोलारस की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति पांडे के द्वारा अपना अंतिम आदेश पारित करते हुए अधिवक्ता मनीष दरबारी के क्लाइंट श्री रामनिवास भार्गव की पक्ष में निर्णय लेते हुए सेवानिवृत पुलिस आरक्षक कमरलाल लोधा को दोषी करार दिया गया अभियुक्त कमरलाल लोधा को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन दण्डनीय अपराध के आरोप में दोषसिद्धि पर 6 माह के सश्रम कारावास से दण्डित किए जाने तथा अभियुक्त पर चैक राशि 5,00,000/- (पांच लाख रूपए मात्र) एवं उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज इस प्रकार उक्त चैक राशि पर कुल ब्याज 1,61,250/- (एक लाख इक्सठ हजार दो सौ पचास रूपये) इस प्रकार कुल राशि 6,61,250/- रूपये (छः लाख इक्सठ हजार दो सौ पचास रूपये) प्रतिकर अधिरोपित किया जाता है।

साक्ष्य विवेचना के अवलोकन में माननीय न्यायालय कोलारस द्वारा यह निष्कर्ष है कि परिवादी यह युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा है कि अभियुक्त ने ऋण अथवा अन्य दायित्व के उन्मोचन हेतु ₹ 5,00,000/- (पांच लाख रूपए मात्र) की राशि का चैक दिया व उक्त चैक उसके खाते में पर्याप्त निधि नहीं होने से अनादरित हो जाने पर परिवादी द्वारा ₹ 5,00,000/- ( पांच लाख रूपए मात्र ) की अदायगी हेतु भेजे गए मांग सूचना पत्र प्राप्त होने के बाद भी भुगतान नहीं किया परिणामस्वरूप अभियुक्त कमरलाल लोधा को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन दण्डनीय अपराध के आरोप में दोषसिद्ध ठहराया जाता है |

दण्ड के प्रश्न पर अभियुक्त व परिवादी को सुना गया। आरोपित अपराध दो वर्ष तक के अधिकतम कारावास से दण्डनीय है तथा समन प्रक्रिया द्वारा विचारणीय है यह मामला सन् 2022 में प्रदान किए गये चैक के अनादरण से संबंधित है अर्थात संव्यवहार हुए 3 वर्ष से अधिक बीत चुके हैं। इस अवधि में सामान्य निवेश करने पर भी पैसे में सारवान वृद्धि हो जाती है ।

परिणामस्वरूप आरोपित अपराध की प्रकृति, विचारण में लगे समय, प्रकरण की परिस्थितियों, अभियुक्त के आचरण एवं परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 117 के द्वारा दर्शाए मापदण्डों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का यह समाधान है कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें अभियुक्त को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाना चाहिए। फलतः अभियुक्त कमरलाल लोधा को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन दण्डनीय अपराध के आरोप में दोषसिद्धि पर 6 माह के सश्रम कारावास से दण्डित किया जाता है।

धारा 357 (3) द. प्र. सं. के अनुसार माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायदृष्टांत आर. विजयन बनाम बैबी (2012) 1 एस. सी. सी. 207 के न्याय मत अनुसार अभियुक्त को चैक राशि 5,00,000/- ( पांच लाख रूपए मात्र ) एवं प्रदर्श पी-1 का चैक जारी किये जाने की दिनांक 19.01.2022 से निर्णय दिनांक तक उक्त धनराशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज दिलाया जाना उचित दर्शित होता है अभियुक्त पर चैक राशि 5,00,000/- ( पांच लाख रूपए मात्र ) एवं उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज इस प्रकार उक्त चैक राशि पर कुल ब्याज 1,61,250/- (एक लाख इक्सठ हजार दो सौ पचास रूपये) इस प्रकार कुल राशि 6,61,250 /- रूपये (छः लाख इक्सठ हजार दो सौ पचास रूपये) प्रतिकर अधिरोपित किया जाता हैं। उक्त प्रतिकर की राशि जमा होने पर परिवादी को अपील अवधि पश्चात विधि अनुसार प्रदान की जाये। 

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