कोलारस - कोलारस में हर वर्ष की भांति इस बार भी हर्षौल्लास के साथ बुधवार को प्रभात फेरी में फूल, गुलाल के साथ नगर में प्रभात फेरी के साथ भव्य रूप में मनाई जाएगी होली मंगलवार को सुबह 6:20 बजे से लगेगा चंद्र ग्रहण का सूतक जिसके चलते बुधवार को भव्य रूप में चल समारोह के साथ मनाई जाएगी होली गुरुवार को भाई बहन के पावन पर्व भाईदूज मनाया जाएगा।
सोमवार को किया गया होलिका दहन मंगलवार की सुबह 6:20 बजे से चंद्र ग्रहण का सूतक लगेगा शाम को 6:47 बजे परायण हो जाएगा चंद्र ग्रहण सूतक के चलते बुधवार को रंगोत्सव के साथ होली खेली जाएगी।
३ मार्च स्नान-दान की पूर्णिमा। आज दोलोत्सव (दोलयात्रा) भी होगी।
आज भारत में ग्रस्तोदित खण्ड़चन्द्रग्रहण (चन्द्रोदय के समय ग्रहण लगा रहे) दृश्य होगा।
होलिका दहन
ऋषिकेश पंचांग अनुसार
होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात्रि (3मार्च 2026, को सुबह 04,56am )से सूर्योदय से पूर्व करना उचित है इस समय भद्रा समाप्त हो जाएगी अतः मेरी समझ से यह मत समुचित है।
जिन्हे निर्णय सागर पंचांग अनुसार होलिका दहन करना है वह नीचे पढे -
संवत् २०८२ में फाल्गुन शुक्ल १४ के दिन (२ मार्च, २०२६) प्रदोषकाल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ती है। दूसरे दिन पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है किन्तु पूर्णिमा की व्याप्ती साढ़े तीन प्रहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धिगामी है, इसलिये शास्त्रवचन के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन (३ मार्च, २०२६) को होना चाहिए था परंतु ३ मार्च के दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण है और ग्रहणकाल तथा प्रदोष से पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त हो रही है।
ऐसी स्थिति में धर्मसिंधु के अनुसार होलिका दहन पूर्व दिन ही करना इदं चंद्रग्रहणसत्वे वेधमध्ये कार्यम ग्रस्तोदये परदिने प्रदोषे पूर्णिमासत्वे ग्रहणमध्य एव कार्यम्।
अन्यथा पूर्वदिने * - (धर्मसिंधु) दूसरे दिन में ग्रस्तोदय ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा न हो तो पूर्व दिन ही होलिका दहन पूजा करें। साढ़े तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धिगामी होते हुए भी धर्मसिंधु में दिये हुए ग्रहण विचार के वचनानुसार होलिका दहन २ मार्च, २०२६ को प्रदोषकाल में करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन भद्रा सायं ०५:५६ से मध्य रात्रि के बाद रात्रि शेष २६:२६ (३ तारीख की सुबह ०५:२६) तक रहेगी। भद्रा के सम्बन्ध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथकाल (मध्य रात्रि) के बाद तक रहे तो फिर भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन करें। इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं रहेगा इससे प्रदोष वेला सूर्यास्त से २ घंटे २४ मिनट) में ही होलिका का दहन करना शास्त्रोक्त है।
ग्रहण लगेगा दिन में 03 बजकर 19मिनिट पर
मोक्ष होगा रात्रि 06, बजकर 47 मिनिट पर
सूतक लगेगा सूर्योदय से पहले ही अर्थात 06बजकर 30मिनिट से पूर्व ही कुछ क्षेत्रों सूर्योदय पहले भी हो सकता है।
नियम बच्चे ,बुजुर्ग , गर्भवती स्त्रियों, रोगी को छोडकर अन्य कोई भी जलपान, भोजन , स्त्री संग ,न करे।
ग्रहण के समय मल मूत्र का त्याग न करे ग्रहण के समय बच्चे ,बुजुर्ग ,गर्भवती महिलाओ को भी भोजन शयन श्रृंगार नही करना चाहिए।
ग्रहण के समय गर्भवती महिला बाहर न निकले
ग्रहण मोक्ष के उपरांत स्नान आदि से फ्री होकर चंद्र दर्शन के उपरांत भोजन आदि ग्रहण किया जा सकता है
खग्रासचन्द्रग्रहण फाल्गुनकृष्ण १५भौमवार (दिनांक ३मार्च २०२६) यह खग्रासचन्द्रग्रहण भारत मे ग्रस्तोदित खण्ड़चन्द्रग्रहण के रुप मे दृश्य होगा तथा चन्द्रोदय के समय केवल इसका मोक्ष दृश्य होगा। भारत के सूदूर पूर्वोत्तर के कुछ भागो में खग्रासचन्द्रग्रहण का मोक्ष दृश्य होगा। भारत के अलावा यह ग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया महाद्वीप, आस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक पैसफिक, अन्टार्कटिका आदि क्षेत्रो में दृश्य होगा। भारतीयसमयानुसार खण्डचन्द्रग्रहण का प्रारंभ घं. १५ मि. १९ पर होगा तथा इसका मोक्ष घं. १८ मि. ४७ पर होग।
भारतीयसमयानुसार खग्रासचन्द्रग्रहण का प्रारंभ घं. १६ मि. ३४ पर होगा तथा इसका मोक्ष घं. १७मि. ३३ पर होगा। यह खग्रासचन्द्रग्रहण आस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया, रुस आदि क्षेत्र मे दृश्य होगा। इसकी कुल अवधि घं. १ मि. १९ की होगी तथा खण्डचन्द्रग्रहण की कुल अवधि घं. ३ मि. २८ की है। ग्रहण का मध्य घं. १७ मि. ४ पर होगा। इसका ग्रासमान १.१५२६ होगा।
यह ग्रहण भारत में चंद्रोदय से पूर्व ही प्रारम्भ हो जावेगा इससे सम्पूर्ण भारत में ग्रस्तोदित ग्रहण ही दृश्य होगा।
चन्द्र ग्रहण का सूतक ९घंटे पूर्व होता है परन्तु ग्रस्तोदय चन्द्र ग्रहण में सूतक पूर्ववर्ती दिन सूर्योदय से या चन्द्रोदय से १२ घंटे पूर्व से ही मान्य रहेगा ! चन्द्रस्य ग्रस्तोदये तू यामचतुष्टयवेधात्पुर्व दिवा न पूंजीत् (धर्मसिंधु)।
ग्रहण का शुभाशुभ प्रभाव राशियो पर
मेष राशि- चिन्ता, विकार।
वृषभ - अपवाद, खेदजनक। मिथुन-सुयोगद, सौख्य, लाभकारक।
कर्क- अपवाद, व्यर्थ खर्च का परिचायक।
सिंह- शरीर विकार, कष्टप्रदायक।
कन्या-आर्थिक चिन्तन, अपव्यय सूचक।
तुला-सुखद लाभद, सुयोगद। वृश्चिक - सुख सुविधा, शुभ फलद।
धनु- मानद रूप में कमी, चिन्तन सूचक।
मकर- देह विकार, प्रपीड़ा प्रभार प्रदायक।
कुंभ- चिन्तन, विकार, अपवाद सूचक।
मीन-सुखद, फलद योग।
यह ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी * नक्षत्र व सिंहराशि मंडल पर मान्य है अतः इस राशि व नक्षत्र वालों को ग्रहण दर्शन नहीं करना चाहिए। अपितु अपने इष्ट देव की आराधना, गुरुमंत्र, जप एवं धार्मिक ग्रन्थ का पठन-मनन करना चाहिए। इस चन्द्रग्रहण का दुष्प्रभाव कश्मीर, बंगाल, सुदूर जंगल भाग, चौपाया पशु, राष्ट्रीय विचारक पुरुष, उच्च उद्योगपति-श्रीमन्त, मालवा संभाग, विंध्याचल संभाग, महापुरुष, विशेष एवं शिल्पकार, दम्भी घमण्डी, कुमारी कन्या, अस्त्र-शस्त्र निर्माता, फिल्म निर्माता, अभिनयकर्ता, गायक वादक तथा महिला वर्ग-विशेष पर प्रभारक कष्टसूचक। वस्तु पदार्थ दृष्टि से शहद श्रीफल, विविध फल, सूत-कपास-वस्त्र, * नमक, चावल, चना, गुड़, जौ-यव, गेहूँ, जुवार, अलसी, सरसों, अरण्डा, ताम्बा, विविध तरल रस पदार्थ तथा काली+पीली रंग वस्तु पर तेजी का गतिक्रम तथा व्यवसाय लाभद बन पावें।
बाड़मेर, जैसलमेर, पश्चिमी गुजरात में ग्रहण मांद्य रूप में दृश्य होगा। अतः इन क्षेत्रों में ग्रहण से सम्बन्धित यम नियम सूतक आदि मान्य नही होगे
4 मार्च प्रतिपदा मे होली (रङ्गोत्सव) का उत्सव मनाया जायेगा। आज से वसन्तोसव का प्रारंभ। होलिका की धूलि धारण करे। आम बौर खाना चाहिये। गीत वन्दन, काममहोत्सवादि का आयोजन होगा।
5 मार्च को भाई दोज
6 मार्च को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत चन्द्रोदय में अर्घ्यदान करें।
8 मार्च रंगपंचमी का पर्व होगा।
11 मार्च भौमवार शीतलाष्टमी व्रत (बसौड़ा) होगा। आज बासी भोजन शास्त्रोक्त है।
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