गुना - जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक जघन्य हत्याकांड में मिसाल पेश करते हुए आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र ने ग्राम कांदई निवासी सूरसिंह भिलाला को अपनी पत्नी रेशम बाई की हत्या का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। खास बात यह है कि न्यायालय ने महज साढ़े तीन महीने के विचारण (ट्रायल) में ही यह फैसला सुनाया है।
क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, 3 और 4 नवंबर 2025 की मध्य रात्रि ग्राम कांदई (थाना म्याना) में आरोपी सूरसिंह ने अपनी पत्नी रेशम बाई की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। अगले दिन मृतका के भतीजे सुरेश भिलाला को उसकी बुआ सायदी बाई ने फोन पर सूचना दी कि सूरसिंह ने रेशम बाई को मार डाला है। मौके पर मृतका के शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले थे और सिर में अस्थिभंग था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि मौत सिर में लगी गंभीर चोट के कारण हुई है।
चुनौतियों के बावजूद मिली सजा
प्रकरण में कोई चक्षुदर्शी गवाह नहीं था और मृतका के पुत्र व रानू बाई जैसे महत्वपूर्ण गवाह न्यायालय में अपने बयान से पलट गए थे। इसके बावजूद, लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने ठोस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। चिकित्सक ने भी बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चोटें सीढय़िों से गिरने के कारण आई हैं। न्यायालय ने समस्त साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपी सूरसिंह भिलाला को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास एवं 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
