बदरवास में निकली भगवान परशुरामजी की विशाल शोभायात्रा, अनुशासन और विश्व मंगलकामना का दिया संदेश
बदरवास - भगवान श्रीहरि विष्णु के छठवें अवतार भगवान श्री परशुराम जी की विशाल और भव्य शोभायात्रा बदरवास में चल समारोह के रूप में निकाली गई।शोभायात्रा गोपाल मोहल्ला स्थित राधारानी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।शोभायात्रा का स्वागत पूरे मार्ग में नागरिकों ने जोशीला स्वागत कर परशुराम जी की पूजा आरती की।
बदरवास में भगवान परशुराम शोभायात्रा की तैयारियों में विप्र समाज पिछले कई दिनों से जुटा हुआ था। गुरुवार को नगर सहित आसपास क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के लोगों का एकत्रीकरण राधारानी मंदिर पर हुआ जहां से प्रातः 8 बजे भव्य शोभायात्रा चल समारोह के रूप में प्रारंभ हुई।
ब्राह्मण समाज द्वारा निकाली गई विशाल शोभायात्रा सामाजिक एकता और अनुशासन का महाकुंभ और आकर्षण का केंद्र रही।जय भगवान परशुराम के गगनभेदी जयकारों से समूचा मार्ग गुंजायमान हो उठा।
शोभायात्रा का प्रारंभ मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर किया गया। चल समारोह में सबसे आगे अश्वों पर सवार युवा हाथों में केसरिया ध्वज थामे चल रहे थे।जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, जनसैलाब उमड़ता गया। शोभायात्रा में महिला पुरुष सभी पीले वस्त्र पहनकर शामिल हुए और अनुशासन का परिचय देते हुए हाथों में भगवा ध्वज थामे भगवान परशुराम की जय जयकार करते हुए बढ़ रहे थे वहीं नवयुवक धार्मिक भजनों पर थिरकते हुए चल रहे थे।
शोभायात्रा में उज्जैन के महाकाल दरबार की झलक देखने को मिली जो विशेष आकर्षण रहा। विशेष रूप से आमंत्रित डमरू और ताशा दल ने एक लय ताल सुर में जब अपनी जुगलबंदी पेश की तो राहगीरों के कदम ठिठक गए। डमरूओं की गंभीर ध्वनि और ताशों की लयबद्ध थाप ने वातावरण में एक अलौकिक ऊर्जा भर दी। इस प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को शिव-भक्ति और परशुराम-शक्ति के अदभुत संगम का अनुभव कराया
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान परशुराम जी का सुसज्जित रथ रहा। फूलों की मालाओं और साज सज्जा से दमकते इस रथ पर भगवान परशुराम के दर्शन के लिए लोग लालायित दिखे।
शोभायात्रा बनी अनुशासन का उदाहरण
परशुराम शोभायात्रा में सबसे प्रभावशाली दृश्य समाज जनों का अनुशासन रहा बहुत बड़ी संख्या में मौजूद महिला, पुरुष और बच्चे पीले वस्त्र धारण कर कतारबद्ध तरीके से चल रहे थे पूरी शोभायात्रा इसी रंग में रंगी नजर आई। मातृशक्ति ने भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा, वहीं युवा वर्ग व्यवस्थाएं संभालने में मुस्तैद रहा अनुशासित कतारबद्ध रूप में निकल रहे विप्र समाज के लोग अनुशासन और विश्व मंगलकामना का पैगाम देते हुए चल रहे थे।शोभायात्रा लंबी दूरी तय करते हुए गोपाल मोहल्ला से निकलकर कटरा मोहल्ला, घुरवार चौराहा,बस स्टैंड,लाल चौक, लक्ष्मीगंज होते हुए बारई रोड स्थित बीटी पब्लिक स्कूल पर इसका समापन हुआ।
नगरवासियों ने किया जोरदार स्वागत, वंदन
बदरवास के जिन मार्गों से यह शोभायात्रा गुजरी नगरवासियों ने पलक-पावड़े बिछाकर इसका स्वागत किया। विभिन्न स्थानों पर पेयजल,शीतल पेय पदार्थ,स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी। जगह-जगह होर्डिंग और स्वागत द्वार बनाए गए थे। नगरवासियों पुष्पवर्षा कर जगह जगह शोभायात्रा का स्वागत किया और भगवान परशुराम की आरती उतारकर सुख-समृद्धि की कामना की।
आकर्षण का केंद्र रहीं महापुरुषों की झांकियां
शोभायात्रा में ब्राह्मण समाज के महान ऋषियों,महापुरुषों की दो दर्जन से अधिक चलित झांकियों ने इतिहास को जीवंत कर दिया जो कि आकर्षण और कौतूहल का मुख्य केंद्र रहीं चलित झांकियों में विश्व कल्याण के लिए अपनी हड्डी तक दान करने वाले दधीचि ऋषि से लेकर महर्षि सांदीपनी, महर्षि पतंजलि, तुलसीदास, वशिष्ठ, चाणक्य, आर्यभट्ट, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, तात्या टोपे, मंगल पांडे, रामकृष्ण परमहंस, राजगुरु, बाल गंगाधर तिलक, बाजीराव पेशवा सहित अन्य महापुरुषों की सुसज्जित झांकियां निकाली गईं जो इन महापुरुषों के त्याग,समर्पण और अमूल्य योगदान का संदेह दे रहीं थीं।
आयोजित हुआ सम्मान समारोह,प्रतिभाओं को मिला प्रोत्साहन
परशुराम शोभायात्रा के पश्चात भव्य सम्मान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में समाज के प्रतियोगी परीक्षाओं तथा शासकीय सेवा में चयनित,सेवानिवृत शासकीय सेवकों सहित आधा सैकड़ा से अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान शील्ड,शॉल,श्रीफल,प्रशस्ति पत्र और भगवान परशुराम जी के चित्र भेंटकर विप्र समाज के वरिष्ठ जनों द्वारा सम्मान किया गया।
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