बदरवास के तिलातिली में विक्रय से वर्जित जमीन के नामांतरण का मेरे द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया - तहसीलदार भार्गव - Kolaras



कोलारस - विगत दिनों एक समाचार पत्र में जमीनी घोटाले की खबर पूर्व बदरवास तहसीलदार एवं वर्तमान कोलारस में पदस्थ तहसीलदार प्रदीप भार्गव के द्वारा सांठ-गांठ कर घोटाला करने को लेकर जो खबर एक समाचार पत्र द्वारा प्रकाषित की गई थी वह पूर्ण रूप से अधूरी जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई थी जिसमें साफ तौर पर देखा व पढ़ा गया था कि तहसीलदार प्रदीप भार्गव को उक्त घोटाले में शामिल होने बताया गया था जिससे उनकी मासिक व प्रशासनिक छवि प्रभावित होना उनके द्वारा बताया गया और इस संबंध में उनके द्वारा स्पष्टिकरण पत्र भी प्रकाशित कर अपनी बात के साथ - साथ उक्त घोटाले के बारे में संक्षिप्त जानकारी भी बताई गई। 

उक्त समाचार पत्र में प्रकाषित समाचार का आषय था कि पटवारी और जमीन उक्त खबर में जमीन घोटाला बताते हुये विक्रय से वर्जित जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण करने का आरोप लगाते हुये तहसील बदरवास के ग्राम तिलातिली की सर्वे नं. 157 / 2 रकवा 0.836 हे. भूमियों का 2022-23 में रामस्वरूप पुत्र जोधाराम पंजाबी के स्थान पर सुशीला बाई पत्नी शंकर सिंह यादव के नाम पर गलत तरीके से नामांतरण किये जाने, तथा सर्वे नं. 157 / 1 रकवा 0.627 हे. भूमि मन्होरा पुत्र ललंजुआ जाटव के नाम से वर्ष 2022-23 में ब्रजपाल सिंह पुत्र शंकरसिंह जाति यादव के नाम गलत तरीके से नाम चढाने का आरोप लगाया है। 


इस संबंध में तहसीलदार प्रदीप भार्गव ने अपना पक्ष रखते हुये पत्र प्रकाषित कर प्रेस को जानकारी देते हुये बताया कि  

घोटाले में तहसीलदार बदरवास के रूप में प्रदीप भार्गव पर आरोप लगाते हुये उक्त फर्जीवाडे का दोषी भार्गव को दर्शाया गया जबकि उनके द्वारा वास्तविकता में ऐसा नही होना बताया गया और उक्त प्रकरण के संबंध में तहसीलदार प्रदीप भार्गव द्वारा भूमिका की बस्तुस्थिति निम्नानुसार बताई गई है जोकि इस प्रकार है -

1. उक्त भूमियों के संबंध में तहसीलदार भार्गव द्वारा कभी कोई आदेश नामांतरण के संबंध में नही किया है। जब तहसीलदार द्वारा कोई आदेश ही नही किया गया तो मैं उसमें गलत कहां हूँ।

2. संबंधित भूमियों के खसरे के किसी भी कॉलम में तहसीलदार के किसी भी आदेश का उल्लेख नही

है।

3. उक्त भूमि के संबंध में नामांतरण संबंधी कोई भी प्रकरण / आदेश न तो शिकायतकर्ता के पास है न अनावेदकगण के पास है न कार्यालय में है। स्पष्ट है कि बदरवास तहसीलदार भार्गव रहते उक्त नामांतरण संबंधी कोई आदेश नही किया गया है।

4. इसी वर्ष माह फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के प्रथम सप्ताह में ग्राम तिलातिली के एक व्यक्ति ने तहसीलदार भार्गव से उक्त प्रविष्टियों के संबंध में बताया था तहसीलदार भार्गव ने तत्काल उक्त व्यक्ति से आवेदन लेकर अनाधिकृत रूप से दर्ज अनावेदक सुशीला बाई पत्नी शंकर सिंह यादव एवं ब्रजपाल सिंह पुत्र शंकरसिंह जाति यादव के विरूद्ध तहसीलदार बदरवास के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक/0068/ब-121 / 2025-26 दर्ज किया जाकर जांच में ले लिया था। अनावेदकगण के विरूद्ध नोटिस भी जारी किये गये थे। पटवारी रिपोर्ट के लिए भी लिख कर पटवारी रिपोर्ट भी मंगा ली थी। इसी दौरान तहसीलदार प्रदीप भार्गव का स्थानांतरण तहसीलदार कोलारस के रूप में होना बताया गया है।

5. जब तहसीलदार द्वारा ना तो कोई आदेश पारित किया गया ना कोई और गडबडी की है तो फिर उसमें तहसीलदार का क्या सांठ-गांठ और क्या गलती है?

6. उक्त प्रकाशित खबर से तहसीलदार भार्गव की सार्वजनिक जीवन में छबि धुमिल हुई है। जबकि तहसीलदार भार्गव का उक्त घोटाले में कोई भूमिका नही होता बताया गया है।


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