शिवपुरी - वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले में सर्पदंश (सांप काटने) की घटनाओं की संभावनाएं बढ़ जाती है। बारिश की वजह से सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर जाने से वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में खेतों, खलिहानों, घरों, गोठानों, लकड़ी एवं भूसे के ढेर, झाड़ियों तथा मानव बस्तियों के आसपास निकल आते हैं। इस दौरान खेतों में कार्य करने वाले किसान, जंगल से जुड़े कार्य करने वाले लोग, बच्चे तथा रात्रि में बाहर निकलने वाले नागरिक विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलेवासियों से सर्पदंश की रोकथाम, बचाव एवं समय पर उपचार के संबंध में आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की गई है स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश एक चिकित्सा आपातकाल (Medical Emergency) है, लेकिन यदि पीड़ित को शीघ्र अस्पताल पहुंचाकर वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए तो अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान में भी तत्काल रेफर करने की व्यवस्था है।
सर्पदंश की घटनाएं क्यों बढ़ती हैं?
वर्षा के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। सांप का मुख्य आहार चूहे है, इसलिए जहां चूहे पाए जाते हैं, आहार की तलाश में वहां सर्प भी निकलते हैं। खेतों में धान रोपाई एवं कृषि कार्य बढ़ने से लोगों का संपर्क अधिक होता है घरों के आसपास झाड़ियां, कचरा, लकड़ी एवं भूसे का ढेर सांपों के छिपने का सुरक्षित स्थान बन जाता है रात्रि में अंधेरे में बिना टॉर्च के चलने से दुर्घटनाएं होती हैं। बरसात के मौसम में चूहों की संख्या बढ़ने से भी सांप आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं।
सर्पदंश से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, झाड़ियां, घास एवं अनावश्यक कचरे को नियमित रूप से हटाएं, लकड़ी, ईंट, पत्थर एवं भूसे के ढेर को घर से दूर रखें, चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, दरवाजों एवं खिड़कियों की दरारों को बंद रखें।
खेत एवं जंगल में
खेत में कार्य करते समय ऊंचे जूते (गमबूट) एवं मोटे कपड़े पहनें, हाथों में दस्तानों का उपयोग करें, घास, लकड़ी या पत्थर उठाने से पहले डंडे से जांच लें, झाड़ियों में बिना देखे हाथ न डालें, रात्रि के समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें, नंगे पैर बाहर न निकलें, बच्चों को अंधेरे में अकेले बाहर न भेजें, फर्श पर सोने से बचें। यदि आवश्यक हो तो मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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