जैन समाज ने जैन मुनियों को मोर हत्या का दोषी बताए जाने पर मेनका गांधी पर एफआईआर की मांग के साथ पुलिस अधीक्षिका को सौंपा ज्ञापन - Shivpuri

शिवपुरी - भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अभी कुछ दिन पूर्व दिल्ली में विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज के समक्ष जाकर जैन मुनि एवं जैन समाज पर 15 लाख मोरों की हत्या का इल्ज़ाम लगाया है जिसकी वीडियो सभी जगह प्रसारित हो रही है जिसके कारण पूरे भारत की जैन समाज अपने आपको बहुत ज्यादा अपमानित महसूस कर रही है।इसी के विरोध में आज शिवपुरी जैन समाज ने सभी जैन संगठनों एवं राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन जिला शिवपुरी को साथ लेकर शिवपुरी पुलिस अधीक्षक श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया को ज्ञापन दिया। 

उक्त आशय का ज्ञापन देते हुए जैन समाज के सूरज जैन एवं महेन्द्र जैन भैयन ने बताया कि यह तथ्य सर्व विदित है कि दिगंबर जैन मुनिराज मयूर पिच्छिका में जो मोर पंखों का उपयोग करते हैं वो मोर द्वारा शरद ऋतु में स्वेच्छा से छोड़े जाते हैं जिन्हें एकत्रित करके जैन मुनियों की पिच्छिका तैयार की जाती है।

दिल्ली में विराजमान परम पूज्य आचार्य सौरभ सागर जी महाराज के सम्मुख बिना बुलाए जाकर भाजपा की वरिष्ठ नेत्री पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा जैन मुनिराजों पर मोर हत्या का झूठा इल्ज़ाम लगाने एवं मोर पंखों पर बैन लगाने की धमकी दिए जाने पर उनके ऊपर जैन समाज पर 15 लाख मोरों की हत्या का झूठा इल्ज़ाम लगाने पर FIR दर्ज करने हेतु ज्ञापन दिया।

ज्ञापन देते समय जैन समाज के सभी संगठनों से एवं राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन जिला शिवपुरी की ओर से अनेक लोग उपिस्थत थे जिनमें सूरज जैन, धर्मेंद्र जैन, विनोद जैन प्रधान, हरिओम जैन, राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन जिला शिवपुरी के मुख्य संयोजक शत्रुघ्न सिंह तोमर, विधि संयोजक रोहित दुबे, संगठन महामंत्री महेन्द्र जैन भैयन, मनोज जैन, अनूप जैन अध्यक्ष सौभाग्य संस्कार संगठन, पीयूष बंसल, अरविन्द जैन शिक्षक, आरती जैन पत्रकार, गौरव जैन, शुभम जैन, मनोज जैन, वैभव जैन, नरेन्द्र जैन, अनुज जैन, पंकज जैन, पवन जैन, अमर जैन, चितरंजन अग्रवाल, शैलेन्द्र जैन,रजनेश जैन, निशांत जैन, मनीष जैन, दिनेश जैन, अंकित जैन, आदि उपिस्थति थे जिन्होंने पुलिस अधीक्षक महोदय से कहा कि शीघ्र अति शीघ्र श्रीमती मेनका गांधी पर जैन समाज एवं जैन संतो पर मोर हत्या का आरोप लगाने के कारण मुकदमा दर्ज करें अन्यथा जैन समाज को मजबूर होकर न्यायालय की शरण लेना पड़ेगी।

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