कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया गुरु पूर्णिमा उत्सव, गुरु महिमा को छात्राओं ने जाना - Badarwas

गुरु ज्ञान, संस्कार और सफलता का आधार :- अवस्थी

बदरवास - शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल बदरवास में गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की गरिमा के साथ मनाया गया कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, मां सरस्वती एवं महर्षि सांदीपनि के चित्र पर माल्यार्पण व पूजन से हुआ गुरु वंदना शिक्षिका शशि गुप्ता ने प्रस्तुत की।

वरिष्ठ शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य परंपरा के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते बल्कि अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से शिष्य के व्यक्तित्व को तराशकर जीवन जीने की कला सिखाते हैं आज भले ही तकनीकी का जमाना है जिससे सिर्फ जानकारी मिल सकती है लेकिन जीवन पथ प्रदर्शक तथा संस्कार और दिशा गुरु ही बताता है गुरु अपने शिष्य पर सर्वस्व उड़ेलकर उसे तरासने का काम करते हैं।

प्राचार्य चंद्रवीर सिंह सेंगर ने कहा कि गुरु ही व्यक्तित्व निर्माण करने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है इसलिए जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और श्रद्धा आवश्यक है चंद्रभान श्रीवास्तव ने छात्राओं से सदैव गुरुओं का सम्मान तथा उनकी दी गई सीख पर चलने का आव्हान किया शिक्षक कपिल परिहार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। 

गुरु ही ज्ञान, विवेक, संस्कार देकर समाज को दिशा प्रदान करते हैं विद्यार्थियों को सदैव अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव बनाए रखना चाहिए।डॉ ममता यादव ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना ही सच्चे अर्थों में गुरु पूर्णिमा का संदेश है।कार्यक्रम में बसंती मिंज,हरवीर यादव ने भी अपने विचार रखे। 

इस अवसर पर गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर ममता श्रीवास्तव, विनीता कुशवाह,  कनक कुशवाह, महेंद्र कुशवाह, दलवीर सिंह, निर्मला शर्मा, हितेन्द्र कुशवाह, नीलेश रघुवंशी, शालिनी श्रीवास्तव, नावेद अली सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं सैकड़ों की संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं अंत में सभी ने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों पर चलने और शिक्षा व संस्कारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

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