
आजाद और तिलक का बलिदान उन्हें अमर कर गया :- अवस्थी
बदरवास - अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और महान राष्ट्रवादी नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर बदरवास के कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को दोनों महापुरुषों के जीवन, संघर्ष, त्याग और राष्ट्रनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत आजाद और तिलक के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि से हुई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा कि चंद्रशेखर आजाद का संपूर्ण जीवन मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कभी अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया और अंतिम सांस तक अपने नाम के अनुरूप 'आजाद' बने रहे। हमारे क्षेत्र का सौभाग्य रहा कि आजाद का कुछ समय खनियाधाना में गुजरा।वहीं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" का उद्घोष कर देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इन दोनों महापुरुषों के साहस, आत्मसम्मान, राष्ट्रभक्ति और संघर्षशील जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।
प्राचार्य चंद्रवीरसिंह सेंगर ने कहा कि आजाद और तिलक जैसे महापुरुषों के आदर्श आज भी नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा की राह दिखाते हैं हमें सदैव इनके अमर बलिदान को याद रखना चाहिए।
कपिल परिहार ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक का जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्र समर्पण का अनुपम उदाहरण है।इन क्रांति वीरों की वीर गाथाएं आज भी लोगों को याद हैं दोनों ही महापुरुष सच्चे अर्थ में भारतमाता के सच्चे सपूत थे।
कार्यक्रम में चंद्रभान श्रीवास्तव, ममता श्रीवास्तव, बसंती मिंज, उदय सिंह, डॉ ममता यादव, विनीता कुशवाह, शशि गुप्ता, कनक कुशवाह, महेंद्र कुशवाह, हरवीरसिंह, दलवीरसिंह, निर्मला शर्मा, हितेन्द्र कुशवाह, शालिनी श्रीवास्तव, नावेद अली, बलराम परिहार सहित सैकड़ों की संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।